Skip to content
SarvaKosh
कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

by महर्षि व्यास

Source: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (origin)

DevanagariSanskritpublished442 pages

Page 105 of 442

Read in context
Page 105

१०६ ॐ श्रीकालिका पुराण ॐ
सरोवर के विकसित महोत्पल का अवलोकन करके उन्होंने हाथ में
स्थित कमल का कुछ भी मान नहीं किया था क्योंकि वह हाथ के
कमल की कान्ति मस्तक में स्थित चन्द्रमा की कान्ति से मलिन हो गया
था । भगवान् हरि ने अपने सुदर्शन चक्र से सूर्य की किरणों से
विकसित हाथ में रहने वाले कमल को ओर सरोवर के पद्म को सब
ओर देखकर सदृश ही माना था । उस सरोवर को जो नाना भाँति के
पक्षियों से समाकुल, सम्पूर्ण सैकड़ों ही कमलिनिओं से संच्छन्न ( ढका
हुआ ) और नीलोत्पलों के समूह से युक्त था, देखा था । वह सरोवर
तट पर देवदारु के वृक्षों के प्रसूनों में रहने वाले परागों से सुगन्धित
जल से समन्वित था और देखने वालों के हृदय को महान आनन्द को
उत्पन्न करने वाला था । उस सरोवर के प्रत्येक तट पर महान विशाल
वृक्ष थे और वह शाद्वलों से भी परिवारित था अर्थात् उसके किनारे
शाद्वलों से चारों ओर घिरे हुए थे । ऐसे उस सुन्दर सरोवर की शोभा
को देखकर शम्भु क्षण भर के लिए उत्सुकता से युक्त तथा शोक से
रहित हो गये थे । तात्पर्य यही है कि उस सरोवर की सुषमा से शम्भु
का शोक मिट गया था और एक विशेष उत्सुकता उनके हृदय में उत्पन्न
हो गई थी ।
क्षिप्र पर्वत और क्षिप्रा नदी की कथा
भगवान् महेश्वर ने उस सरोवर से निकली हुई शिप्रा नदी का
अवलोकन किया था जिस प्रकार से इन्द्र मण्डल से भागीरथी गंगा
और मेरु पर्वत से जम्बु नदी निकलती है, उसी भाँति भगवान् शम्भु से
क्षिप्र से शिप्रा को विनिसृत किया था । ऋषियों ने कहा- क्षिप्र नाम
वाला सरोवर कौन-सा है और किस प्रकार से उससे शिप्रा नदी निःसृत
हुई थी ? इसका प्रभाव किस प्रकार का है, यह सभी कुछ आप
विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए । मार्कण्डेय मुनि ने कहा-हे मुनिगणों!
अब आप लोग श्रवण कीजिए कि जिस प्रकार से शिप्रा नदी निःसृत
हुई थी । हे महाभागों! यह भी सुनिए कि उस शिप्रा का क्या प्रभाव