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कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

by महर्षि व्यास

Source: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (origin)

DevanagariSanskritpublished442 pages

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Page 103

१०४ ॐ श्रीकालिका पुराण ॐ
मान (मैं बहुत ही महान् हूँ, ऐसा मान मन में रखना), दम्भ अर्थात्
पाषाणु, मद, प्रमोद, ईर्ष्या, असूया, अक्षान्ति और असत्यता। आप तो
विष्णु के ही स्वरूप वाले जगतों के विधाता हैं अर्थात् जगतों की रचना
करने वाले हैं। जो भी आपको महान् मोह कर देने वाली सती हैं, यह
तो आपकी ही लोकों के मोह के लिए माया है। जो समस्त लोकों को
जन्म में और गर्भ में पूर्व देह की बुद्धि को विमोहित करती हुई, विनाश
करके बाल्य अवस्था में जन्तु का पालन किया करती है आज वह भी
शोक से सहित आपको विमोहित कर रही है। प्रत्येक कल्प में पहले
आपने सहस्रों सतियों का त्याग किया था जो मृत हो गई थीं। इस
प्रकार से चर-अचर लोक के हित के ही सम्पादन करने के लिए उसी
भाँति आपके द्वारा यह सती पुनः ग्रहण की गई थी। हे वृषभध्वज!
आप ध्यान के योग द्वारा देखिए दूसरे जन्म में जो सहस्रों सतियां मृत
हुई हैं आप यथा तथा परिवर्जित हैं अथवा जैसी की तैसी वह हैं।
क्योंकि वह पुनः समुत्पन्न होकर हे ईश! वह आपको ही प्राप्त करेगी।
जो आप देवगणों के द्वारा भी दुष्प्राप्य होते हैं और फिर वह जैसी जाया
आपको होने वाली है। यह सभी कुछ आप ध्यान के योग द्वारा देख
लीजिए।
मार्कण्डेय महर्षि ने कहा-इस रीति से ब्रह्माजी ने बहुत प्रकार से
ज्ञान को भगवान् शंकर से कहा था। फिर उस गिरिराज ने नगर से
उनको निर्जन स्थान में गत कर दिया था। इसके उपरान्त हिमवान् के
प्रस्थ में और उनके नगर के पश्चिम दिशा में द्रुहिण आदि ने शिव नाम
वाला परिपूर्ण एक सरोवर देखा था। उस परम एकान्त स्थान की
प्राप्ति करके ब्रह्मा और इन्द्र आदि देवों ने वहाँ पर उपसेवन किया था
अर्थात् वहाँ पर बैठ गए थे और जैसा भी न्याय था उसी के अनुसार
उन्होंने महेश्वर को अपने आगे बिठा लिया था। वह शिव नाम वाला
सरोवर बहुत ही सुन्दर था जो सभी देहधारियों में मन को हरण करने
वाला था। उसका जल ठंडा और निर्मल था। वह सरोवर अपने सभी
गुणों से मानस सरोवर के तुल्य था। भगवान् शम्भु उस सरोवर को