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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

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किस प्रकारसे साबित हुआ कि, खुदा कुरबानीसे राजी है। कुरबानीके लिये कोई आयत उत्तरी ? आकाशवाणी हुई ? अथवा कोई फिरिश्ता प्रगट हुआ ? या स्वप्न देखा ? कि, यह उसी खुदाकी तरफसे है। या और ही कोई है कुरान ५० सूरात रकूअमें लिखा है कि, हम बहुत नजदीक हैं तरफ उसके (इनसानके शहरगसे)।

जो खुदा व्यापक और शहरगसे नजदीक हो फिर उसखुदाका बचन भी शहरगसे निकट होना चाहिये, न कि, खुदा तो मेरे पास हो उसका कलाम फिरिश्तों के द्वारा आकाशसे आवे। इन सब बातोंसे साबित होता है कि, खुदाको न पहचान करकेही नबियोंने जबह और क़त्लकी आज्ञा दी है। ऐसी आज्ञाएं उसकी ओरसे नहीं हैं।

हजका यम - महम्मदी लोग हजको जाते हैं मक्काके निकट पहुंचते हैं, किसी वृक्षका पत्ता नहीं तोड़ते, घास नहीं उखाड़ते किसी जीवधारीको किसी प्रकारका भी दुःख नहीं देते, वरन् जूँ भी नहीं मारते। जो कोई इसके विरुद्ध कुछ करता है तो उसका हज पूरा हुआ नहीं समझते। इन बातोंसे जाना जाता है कि, मुसलमानोंका खुदा व्यापक और सर्व दृष्टा नहीं है, इसीलिये केवल मक्कामेंही उसके नियमोंका पालन होता है। यदि व्यापक है तो वही नियम सब जगह होने चाहिये, यदि खुदा केवल मक्कामें ही है तो सब जगह निमाज पढ़ना और रोजा रखना व्यर्थ है। इस कारण यह स्वीकार करना पड़ेगा कि, हजके नियमोंका सर्वत्र पालन होना चाहिये।

अनुचितका विधाता - इब्राहीम और मूसा आदिकका खुदा प्रगटही खाता पीता था, पर मुहम्मदका खुदा जो बेचून और बेचारा है, छिपाकर खाता था परदेसे बातचीत भी करता था। यह सर्वदासे सभी नबियोंको भिन्न २ कानून और बातें बतलाकर छल कपटसे लड़ाता आता है। किसीको शराब पीना सिखलाया, तो किसीको मांस खाना बतलाया, किसीको जना (व्यभिचार) करनेकी आज्ञा दी, किसीको उत्तम खानेको भी मना कर दिया। किसीको जीवहत्या करने की आज्ञा देता है। खरकईल नबीको विष्ठाकी पकी रोटी खिलाता है। यह बात खरकईल नबीकी किताबका बाब - १२ आयत-ईसाके शिष्य पितरसको डोंगर ढोर. कीड़े, मकोड़े आदि खानेकी आज्ञा दी। देखो रसूलोंका अमाल- ११ बाब ५१३ आयत-इसियाह नबीको जनाकार (व्यभिचारिणी) औरतसे मित्रता रखनेकी और व्यभिचारकी लड़कीसे विवाह करनेका आदेश दिया।

समीक्षा - इन नबियोंमेंसे किसीसे दरियापत किया जावे कि, आप कभी