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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

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पहिला बाब (२७-२८) आयत तक देखो फिर कुरान मजीदकी गवाही देख लो कि, जानना चाहिये कि, खुदा जागृत है इसलिये मनुष्यके लिये भी जागृत (विवेकी) होना चाहिये। जो जागृत नहीं वह मनुष्य ही नहीं, जागृतके लिये बनाया गया यदि स्वप्नका काम करे तो वह कैसे मनुष्य कहा जा सकता है। अविवेकतासे उसको वह प्रकाश कदापि नहीं मिल सकता, जिसके द्वारा उत्कण्ठ पद प्राप्त हो सकता है।

दूसरी पुस्तक जबूर।

दाऊदका जबूर सरदार मुगनीके लिये ४ बाबकी ६ आयतमें देखो। जबीहा और हदीयाको तू नहीं चाहता, तूने मेरी खोलें चढ़ा दी तू खतीबका तालिब नहीं।

आसिफका जबूर ५० बाब, १३-से १५ आयत तक देखो - खुदा कहता है कि, क्या मैं बैलोंका मांस खाता हूँ? या बकरीका लोहू पीता हूँ? तू धन्यवादका बलिदान कर उसीको परमात्माके आगे भेंट चढ़ा।

आशिफकी जम्बूरका ५० वां बाब २३ आयतमें लिखा है कि, जो कोई धन्यवादका बलिदान चढ़ता है, मेरा प्रकाश प्रकट करता है उसको जो अपनी बोल चाल दुरस्त रखता है उसे खुदाकी निजात दिखलाऊंगा।

दाऊदका जबूर सरदार मुगनीके लिये ५१ बाब-१५ से १६ आयत तक लिखा है कि, ऐ खुदाबन्द! तू मेरी लबोंको खोल दे तो मेरा मुंह धन्यवाद करेगा। कहेगा कि, तू जीवहत्याके बलिदानसे खुश नहीं। नहीं तो मैं तेरी खुशनुदी देता नहीं! खुदाका बलिदान टूटा हुआ मन है। टूटा हुआ मन; ऐ खुदा! तू तुच्छ न जानेगा।

दाऊद गीत १०४ - तेरे कामका फल जो है उससे पृथ्वी आसूदः यानी (भरी हुई है)। चारपायोंके लिये घास और मनुष्योंके लिये शीक है।

दाऊद गीत मजमूर (५१) ऐ खुदा! तू खूनसे मुझे बचा ले मेरी सलामतीके लिये मेरी जबान तेरे रहमकी धन्यवाद करेगी। कुर्बानीसे तू राजी नहीं, न तो वह चढ़ाऊँ। कुर्बानीसे मालिक जरा भी खुश नहीं है।

दाऊद गीत मजमूर-४० देख। जबह और कुर्बानीसे तू रजामन्द नहीं था, एक जिस्म (शरीर) पाकको तूहीने मेरे वास्ते रखवा था, जब बशरसे कुर्बानी नहीं चाही बिलकुल।

जो कुछ मैंने पिछले प्रमाणमें लिखा, वही बात मूसाकी शरीअत और तौरतकी हुई, पैमाइशके १ बाब २९ से ४० आयत तक खुदाने कहा कि, प्रत्येक