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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

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अर्थ-तीन गुणोंके विषयवाले वेद हैं, हे अर्जुन ! तू इन तीन गुणोंसे परे हो निर्द्वन्द सदा सत्त्वमें स्थित, योग क्षेमसे रहित और आत्मवान् हो।

इसके ऊपर बहुतोंने व्याख्या किये हैं, दो तीन मतोंका यहाँ दिग्दर्शन कराया-जाता है ।

१ पहिली व्याख्या-हे अर्जुन ! वेद तो तीन गुणोंकी बातोंकोही कहनेवाले हैं अर्थात् तीन प्रकारके गुण सत्त्व, रज, तममें तो लोग फँसे हुए हैं उन्हींको सत्तोगुणी रजोगुणी और तमोगुणी कामनाओंकी पूर्तिके मार्ग वह बतलाते हैं । इन कामनाओं और गुणोंके बन्धनमें जकड़ा हुआ कभी मुक्त नहीं हो सकता । इसलिये हे अर्जुन ! तू इन तीन गुणोंसे परे हो जा अर्थात् वेदोंके घेरेसे बाहर होजा ; नहीं तो, इन्हीं तीनों गुणोंके बनाये हुए स्वर्गादि लोकोंमें भ्रमण करता हुआ, आवागमनके चक्रसे कभी बाहर नहीं निकल सकेगा । क्योंकि, सत्त्व, रज और तम इन तीन गुणोंकी कामनाओंसे स्वर्ग नरकादि आवागमनके अतिरिक्त विशेष कोई लाभ नहीं होता ।

सुख दुःख लाभ अलाभ, पुण्य, पाप, जीत, हार और शीतोष्णदि द्वन्द्वोंसे रहित सदा सत्यमें स्थित हो अर्थात् इन तीन गुणोंसे परे जो सत्य वस्तु है उसे गुणातीतमें निश्चय रख । शरा बन, कायर और अज्ञानी मत बन । सत्यमें जो स्थित होता अर्थात् सत्यमें जो निवास करता अथवा सत्यमें अद्वार रखता है, सो कभी कायर हो मायिक नाशमान गुणोंमें नहीं फँसता । वह योग क्षेमसे रहित होता है अर्थात् मायिक वस्तुओंकी न तो वह प्राप्त चाहता है न उनकी रक्षाके लिये अपना समय नष्ट करता है । क्योंकि, सत्यका आश्रय लेनेवाला जानता है कि, वे मिथ्या मृगतृष्णाके जलके समान ठगनेवाले और क्षणिक हैं, इस लिये सत्यका आश्रय लेकर तू सावधान हो जा, कभी भी, इन त्रिगुण्यक विषयोंकी कामनाकर उनके वशमें मत आजा । वरन उनके विषयोंसे चित्तकी वृत्तिको हटाकर अपने सत्यात्मामें स्थिति कर । इसीलिये हे अर्जुन ! इन त्रिगुणात्मक मिथ्या संहारमें फँसानेवाले वेदोंसे सदा अलग रह, नहीं तो आवागमनसे कदापि नहीं छूट सकेगा । हे अर्जुन ! इसी प्रकार तू कर्मोंके बन्धनको तोड़कर मोक्षको प्राप्त होगा ।

भगवान्के कहनेका अभिप्राय यह है कि, वेद संसारको वृद्धि करनेवाले और उसीमें रहकर सुख माननेका मार्ग बतलाता है क्योंकि, संसारमें सत्यकी खोज करनेवाले-“लाखनमेंको गने क्रोडन मध्ये एक” के कहावत अनुसार, कोई एक संस्कारी जीवही होते हैं, जो सत्तगुरुकी शरण होकर, सत्यको प्राप्तकर