Skip to content
SarvaKosh
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

Page 933 of 1367

Read in context
Page 933

तो कुछ कालके पीछे अपनी एक आंख खोली । मनुष्यने चिड़ियाकी धूर्तता जानके उसको उठा लिया । उसी समय उसका शिर तथा पांव लटक पड़ा, मानो वह मर गई हो मनुष्यने अपनी जेबमें रख लिया । कुछ कालके बाद भागने तड़फने लगी । उसने बाहर निकाला फिर उसी प्रकार मुर्दा होने लगी । उसने उसको फिर एक जगह रख दिया आप अलग खड़ा हुआ । पांच मिनटोंके पीछे अपना शिर उठाया इधर उधर देखकर भाग गई ।

पफन ।

एक प्रकारकी चिड़िया होती है । अङ्गरेजी भाषाका इसका नाम पफन है आइलैण्डकी भूमिमें होती है । लोग उसको बंसी लगाके फँसाते हैं जब एक चिड़िया फँस जाती है तो उसके साथी तीन चार मिल कर उसे अपनी ओर खींचते हैं । इस तरह कितनेही बच जाते हैं ।

क्रासबीक ।

बोर्डरिप साहबका कथन है कि, यह एक प्रकारका पक्षी होता है जिसको अङ्गरेजीमें क्रासबीक कहते हैं क्रासबीकका अर्थ टेढ़ी चोंचवाली चिड़िया है यह पक्षी थोरड़िया देशमें होता है वहाँके पहाड़ी लोग इसके विषयमें ऐसा ध्यान करते हैं कि जिसके घर यह पक्षी होता है वह अपने स्वामी की बीमारीको अपने ऊपर ले लेता है उसका स्वामी आरोग्य लाभ करता है । लोग इसी कारण इस चिड़ियाको अपने घरमें रखते हैं लोगोंका ऐसा भी विश्वास है कि यदि इस पक्षी का टेढ़ा चोंच दाहिनी ओर झुका हो तो मर्दकी देहसे सदी तथा गठिया आदिकका रोगभी दूर होता है । यदि बाये ओरको झुके तो स्त्रियोंके शरीरकी बीमारियोंको दूर कर दे यह प्रायः मिरगीकी बीमारी दूर हो जाती है । वहाँके लोग इसका जूठा पानी पीते हैं उनका ऐसा ध्यान है उसका जूठा जल रोगोंके लिये अच्छा है ।

भुजंगा ।

कप्तान ब्राउन साहब लिखते हैं कि, एक दिन एक बहुत ठट्ठेकी बात हुई विलियनसेनरेट नाम का एक मनुष्य एडनबर्गके पास कर्मर्टन नामके स्थानमें रहता था उसने भजैंटा पाला था । अङ्गरेजीमें इसको डा कहते हैं । हिन्दीमें भोजैंटा अथवा भुजङ्ग कहते हैं । एक दिनकी बात है कि, टेबुलपर ह्विस्की मदिराका आधा गिलास भरा रखवा था । भुजङ्ग उस जगह बैठ गया उसे पीलिया शराबीकी तरह मस्त हो गया । उसने पर तथा पांव लटक दिया । अपने मुँहके बल पृथिवी पर गिर पड़ा । उसके पांव ऊपरको उठ गये । ऐसा जान पड़ा कि, मानों वह मर गया । पानी उसके मुँहमें डाला गया पर पी न सका । वह लफानेलेके कपड़ेमें लपेट