कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
by कबीर साहेब
Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)
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Read in contextनरको शिकारीने बन्दूकसे मार डाला । वह सदाही अत्यन्त क्रुद्ध होकर अपने नरका परिशोध शिकारीसे लेती, उसपर अत्यन्त क्रुद्ध हो उसके माथेपर चोंचे मारा करती उसके चारों ओर चिल्लाती फिरती जहाँ कहीं उस शिकारीको देखती वहीं वह उसपर आक्रमण करती । रविवारके दिन आखेट करनेवाला अपना वस्त्र बदल के दूसरे प्रकारका वस्त्र पहनता उस समय वह पहचान न सकती थी इसी प्रकार उसपर आक्रमण करती थी ।
एक बहुतही मिष्टभाषी चिड़िया बहुत मीठा आवाजसे गाया करती थी । उसको प्रायः खिड़कीके बाहर रख देते थे । वह उच्च स्वरसे भली प्रकार गाया करती थी । एकदिन ऐसी घटना हुई कि, उसका पिंजरा मकानके बाहर वृक्षोंके पास धरा हुआ था उसके निकट एक अबाबील आकर पिंजरेके चोंगिंदे फिरेने लगी उस पिंजरेके ऊपर बैठके अपनी बोलीमें पिंजरेके भीतरवाली चिड़ियासे बोलने लगी कुछ काल तक दोनों आपसमें बातें करती रहीं कुछ कालके पीछे चिड़िया उड़ गई । क्षणोंमें एक कीड़ा मुहमें दबाकर लौट आई कीड़ेको गानेवाली चिड़ियाके पिंजरेमें डालकर चली गई । उस दिनसे वह नित्य अपने मित्र अबाबील के लिये एक कीड़ा लाया करती भेंट करके चली जाया करती । दोनों अबाबीलोंमें बहुत मैत्री होगई । आसपासके लोग इनका कौतुक देखनेके लिये उस चिड़ियाका पिंजरा रोज बाहर धर दिया करते । वह अबाबील पूर्वानुसार अपने मित्रकी सुधि लिया करती । जब कोई मनुष्य समीप आता तो दूर भाग जाती अकेलेमें आकर अपने मित्रसे मिला करती । सरदी का मौसम आया तो उड़ गई फिर कभी दिखाई नहीं दी ।
सांप निकाल लेनेवाली — सींगके समान चोंचवाली एक चिड़िया होती है । जिसे अङ्गरेजी भाषामें हार्न बिल कहते हैं वह कुरुप्पा होती है । उसका यह नियम है कि, पृथिवीमें जहाँ कहीं सांप छिपा हो खोदकर निकाल लेती है ।
रेल ।
रेल एक प्रकारकी चिड़ियाको कहते हैं । वह हरी घास तथा अनाजके खेतोंमें रहती है । बहुत दुष्ठा तथा धोखेबाज होती है जब कोई उसको पकड़ लेता है उसको भागनेकी कोई राह नहीं मिलती तो मरनेका बहाना करती है इतना स्वांस बन्द करती है कि, मानों उसमें तनिक भी प्राण नहीं रहा है ।
एक बार एक कुत्ता इसी जातिकी चिड़िया पकड़के एक मनुष्यके पास ले गया । उस समय जान पड़ा कि, वह निर्जीव है तब उस मनुष्यने उसको अलग धर दिया स्वयम् उसके पास खड़ा रहा । चिड़ियाने जान लिया कि, अब यहाँ कोई नहीं