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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

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होती हैं उनके रहनेको वैसाही घर मिलता है जैसा कि, उनका स्वामी उनके लिये पसन्द करे । कितनीही अंग्रेजी पुस्तकोंमें चींटियोंकी बुद्धिमानकी अनेक कहानियाँ लिखी हैं । हन्श तथा आमेजनकी चींटियोंकी बहुतसी विचित्र बातें लिखी हैं । लिटरेली और कबरली साहबों की रची पुस्तकोंके देखनेसे चींटियोंके विचित्र कौतुक तथा न्यारी २ लीलाएँ मालूम हो सकती हैं ।

हन्शकी चींटियाँ—जैसा डाक्टर गोल्ड स्मिथ साहबने अपनी नेचर हिस्ट्रीमें लिखा है । हन्श देशमें चींटियोंके ऐसे बड़े बड़े घर होते हैं कि, जिसको पहले न देखनेवाला कभी अनुमानही नहीं कर सकता है कि, वे ऐसी छोटी चींटियोंकी बनाई होंगी । एक एक टीले पन्द्रह पन्द्रह फीट ऊँचे होते हैं । उन टीलोंके भीतर घर तथा ऊपरी घर आदिक अनेक सुघर घर बने होते हैं । बादशाही महल, तथा रईसोंके अलग और सेवकों तथा दासोंके निमित्त न्यारे न्यारे घर तैयार करती हैं । बादशाह तथा बेगम अपने अपने महलोंमें रहती हैं, चौकीदार तथा द्वारपाल द्वारपर खड़े होकर पहरा चौकी देते हैं । पहरेमें सचेत रहते हैं वैरीसे सामना करनेको सब हथियार बांधकर प्रस्तुत रहते हैं । चींटियाँ बहुत बच्चा जननी हैं जब उनको गर्भ रहता है । तो उनके हिजड़े गुलाबों पर सेवाका समस्त बोझ रहता है । वे गर्भिणी होती हैं तो उनका पेट इतना फुलता है कि, जितना उनका शरीर होता है उससे दो सहस्र गुनेसे अधिक बढ़ जाता है, जब अण्डे देती हैं तो दास रक्षामें तत्पर होते हैं । चौबीस घण्टोंके बीचमें एक चीटी आठ लाख अण्डा देती है । यदि पशु पक्षी और मक्खी इत्यादि उनको चुन चुनकर न खाजाये तो उनकी संख्यासे समस्त पृथिवी भर जावे । वे बड़ी २ चींटियाँ होती हैं वहाँके लोग उन्हें भून भूनकर खाते हैं उनका कबाब बनाते हैं । डाक्टर लाइस्टन् साहब इत्यादि उनकी युक्तियों और गुणोंकी बहुत प्रशंसा किया करते हैं । उनके देखनेसे मनुष्योंकी सारी युक्तियाँ निष्फल जान पड़ती हैं ।

चींटियोंका बादशाह और सुलेमान—मुसलमानी पुस्तकोंमें लिखा है चींटियोंके बादशाहने सुलेमान बादशाहको ससैन्य निमंत्रण दिया । चींटियोंके बादशाहका न्याय सुविचार सुलेमान बादशाहके न्यायकी अपेक्षा उत्कृष्ट रहा । चींटियोंका बादशाह सुलेमान शाहके सिंहासन पर चढ़ गया । सुलेमानको यह प्रमाणित करके दिखा दिया कि, मेरा न्याय तुमसे बढ़कर है । सुलेमानने मान लिया कि ऐ चींटियोंके बादशाह ! वस्तुतः आपका न्याय मुझसे बढ़कर है ।

दीमक—चींटियोंकी अनेक जातियाँ होती हैं । भारतवर्षकी श्वेत चींटियाँ लकड़ियोंको खा जाती हैं । उन्हें दीमक कहते हैं ।