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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

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एक बार फिर घरके भीतर ले गई आप उस बाड़ेके द्वारपर बैठ गई, जिसमें वे सब भाग न जायें। सांझ होतेही भेड़ बकरियोंका झुण्ड लेकर मनुष्य रूपी राक्षस आया साधारण नहीं, किन्तु हूष्ट पुष्ट लम्बा चौड़ा राक्षस था। उसने मनुष्योंको देखकर एक विशेष स्थानमें बन्द कर दिया। सब बकरियोंका दूध दुहकर एक कड़ाह चढ़ा दिया उसमें दूध गर्म होनेके लिये डाल दिया। दूधके औट जानेपर उनमेंसे दो मनुष्योंको पकड़ शिर टकराकर मार डाला। उसी दूधकी कड़ाहीमें उनको पकाकर खा गया सब दूध पीकर अचेत होकर सो गया। शेषके सब साधुओं ने विचार किया कि, अब तो यह राक्षस हम सबको एक एक करके खा जायगा कदापि न छोड़ेगा। उन लोगोंने यह हिम्मत की कि, बड़े २ चिमटे जो उनके पास थे उनको आगमें लाल किया एक बारगी ही उस दैत्यकी दोनों आँखोंमें चलाकर उसको अन्धा कर दिया। वो दोनों आँखोंके फूट जानेपर घबरा कर उठा और चिल्लाकर इधर उधर पकड़ने दौड़ा। साधु जब उसके हाथ न आये तो वह भेड़ों को पकड़ पकड़कर बाहर फेंकता था। साधु उससे तथा उसकी गायसे किसी प्रकार बच कर निकल भागे।

भिस्तीका बैल—पंजाब देश फिरोजपुर जिलेके भाईकोट कसबामें एक भिस्तीने अपने बैलको ऐसा सिखलाया था कि, आपसे आप वह सब कार्य किया करता था। जल खींचनेके समय आपसे आप ठहर जाता था, जो कोई उसका बैल मोंगकर कार्यके लिये ले जाता और कह जाता कि, मेरा इतना कार्य है तो वह भिस्ती अपने बैलसे कह देता कि, इतने समय तक इसका कार्य करके चले आना। तो वह बैल उनके साथ उतने कालतक ही कार्य करके आ जाता अधिक न करता था, यदि वह मनुष्य अपनी प्रसन्नतासे बैलको भेज दे तो अच्छी बात है, नहीं तो वह आपही भागकर अपने घर चला आता था। वह बैल अपने काम तथा समयको भली भाँति पहचानता था। साधारण समय पर अपना कार्य करता था। सरकारी कारबारियोंकी तरह अपने मनकी घडीमें अपना समय देख लिया करता था।

न्यायकी प्रार्थना—शाहजहाँके रहनेके मकानके पास एक घन्टा बँधा रहता था इसका यह नियम था कि, जो कोई उस घन्टेको बजा देता था उसका उसी समय न्याय किया जाता था। एक बार एक भिस्तीके बैलने आकर घन्टा बजा दिया उसी समय बादशाहने उस बैलको अपने सामने बुलाया उसकी पखाल ढुलाई गई तो वह अधिक वजनदार निकली यह देखकर बादशाहने वजन मुकर्रर कर दिया कि, इससे अधिककी जो कोई बैलपर पखाल रखेगा उसे दण्ड दिया जायगा।