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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

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जान लेता है कि, उस ओर कहीं जल है, इस कारण सवार उसको नहीं रोकता ऊंटको इच्छानुसार चला जाने देता है। अन्तमें वह जलके किनारे जा पहुँचता है। उस स्थानपर पहुँचकर ऊंटके सवार तथा ऊंट दोनोंही सन्तुष्ट हो जाते हैं।

हवसियोंकी धाणशक्ति—उस देशके हवसियोंको भी सृष्टनेका अधिक बल है, यदि वे सड़क पर पगका चिन्ह पड़ा देखें, तो घासको सृष्टकर बता देते हैं, कि, हवशीके पौवका चिन्ह है अथवा फारसीके चरणोंका ही चिन्ह होता है मैंने यह हाल गोल्ड स्मिथ साहबके नेचरल हिस्टरीसे लिखा है।

घोड़ा

घोड़े अत्यन्त ही शिक्षाग्राही होते हैं सिखानेसे सब कुछ सीख जाते हैं ये बुद्धिमानोंके बड़े काम किया करते हैं, तीन कोससे बैरीको सृष्टकर केवल गन्धसे जान जाते हैं, जब घोड़े बनमें रहते हैं तो उनके नाकका बल बढ़ जाता है। बैरीको दूरसे पहचानकर दूसरे घोड़ोंको सूचित कर देते हैं। जब बनलें घोड़े चलते हैं तो उनका सरदार आगे आगे चलता है।

गोरखर—भी घोड़ाहीकी जाति है। वह बड़ा सुन्दर होता है गोरखरोंके झुंडके झुंड बनमें चरा करते हैं, उनमेंसे एक चौकीदार खड़ा होकर पहरा दिया करता है। जब दूरसे आपत्ति आती दिखाई देती है तो वह सब चरनेवालोंको सूचित कर देता है। आपत्तिसे सूचित होकर सभी भाग जाते हैं।

घोड़ोंके दो झुंड—एक स्थानमें नहीं चर सकते। दोनों झुण्डोंमें बड़ी लड़ाई होती है। घोड़े घोड़ोंके साथ लड़ते हैं। बछेड़े बछेड़ोंसे तथा घोड़ियों घोड़ियोंसे लड़ जाती हैं। घोड़े अपनी अपनी दुमोंको लहराते हुए घोड़ियोंको खड़ा करते हैं। अपने अपने दुमोंको आपसमें खड़खड़ाते हैं। एक दूसरेको अपने दांतोंसे पकड़ लेते हैं जो झुण्ड लड़ाईमें विजय पाता है वह अनेक घोड़ियोंको ले जाता है।

जंगली घोड़े और भेड़िये—वसन्त ऋतुमें भेड़िये आते हैं, वे बछेड़ा खानेके उत्सुक होते हैं। यदि घोड़ोंका झुण्ड बड़ा हो तो रातको छिपकर आते हैं दिनको नहीं आते। यदि बछेड़ोंको घोड़ोंके झुण्डसे इधर उधर पावें तो तुरन्त मार लेते हैं। जब भेड़िये बछेड़ोंको मारते हैं। तो घोड़े भेड़ियोंके ऊपर बदला लेनेके लिये आक्रमण करते हैं। जिनके सामने से वे भाग जाते हैं। बछेड़ोंको तड़पता देखकर उनकी माता बचानेको दौड़ती है इससे वो स्वयम् मारी जाती है। घोड़े देखते हैं कि, भेड़िये आते हैं तो वे प्रतिशोध लेनेको दौड़ते हैं। घोड़े बहुत सचेत होते हैं। उनकी भेड़ियोंसे लड़ाई होती है उस समय घोड़े अपने