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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

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जहां कि वह जमींदार छिपा हुआ था । मूंगके खलिहानको तितर बितर करके उसको पबड़ लिया पीछे घसीट घसीटकर मारड़ला । अपने मुंहसे उसके अङ्ग प्रत्यङ्ग उखाड़ दिये मांस तथा हड्डियोंको बिखेर दिया । अपने वाड़ेको पलट आया जमींदारके भाईकी चारपाई कूद गया आंगनमें जाकर चुपचाप खड़ा हो गया, जब सबेरा हुआ तो जमींदारके भाईने देखा कि, ऊंटका मुंह तथा पाँव रक्तसे भरे हुये हैं जान लिया कि, इस ऊंटने मेरे भाईको मार डाला है । खेतमें जाकर देखा तो उसके भाईके सब अङ्ग एक स्थानपर नहीं । वहाँसे पलटकर ऊंटका शिर धड़से अलग कर दिया ।

ऊंटनीका मोह—फीरोजपुरके मौजे दूधमें एक ऊंटनीका बच्चा मर गया था तीन रात दिन तक उसके नेत्रोंसे अशुपात होता रहा । उसने तीन दिवसतक कुछ नहीं खाया, केवल बच्चेकी यादमें रोती ही रही ।

चूरचूरकर दिया—ऐसे ही एक जमींदारकी भी कहानी है, उसने अपने ऊंट को मारा, वह उससे अपना प्रतिशोध लेनेको तैयार हुआ । जमींदार सचेत था कि, ऊंटसे मेरा वैर होरहा है । वह घुंघरू बांधकर ऊंटको अपने वाड़ेके आंगनमें छोड़कर खेतमें जाकर चारपाई पर लेट रहा । आधी रातके समय लोग सो गये सब ओर सूनसान हो गया धीरेसे वह ऊंट फलांग मारकर बाड़ेसे बहिर्गत हो वहां जा पहुँचा जहां कि, जमींदार सोया हुआ था । ऊंटके घूँघरूकी आवाज जमींदारके कानोंमें पहुँची उसने जान लिया कि, ऊंट मुझको मारने आता है । उसने एक लकड़ीको अपनी जगह पर लिटा दिया अपनी चादर उसपर डालकर आप कहीं दूर छिप गया ऊंट उस खाटके समीप पहुँचा तो वह उस खाट पर बैठ गया उस चारपाईको चूर चूर कर दिया उस लकड़को तोड़ तथा चादर को फाड़ कर टुकड़े २ करके पलट आया पीछे बाड़ेको आ चुपचाप खड़ा हो गया । जमींदारने ऊंटके वैरका हाल जानकर उसका उचित प्रबन्ध कर दिया ।

घ्राण शक्ति—हन्शदेशमें बड़ा लम्बा चौड़ा बन है, वहाँ दूर २ तक बालू है वहाँ दूर दूर तक जल नहीं मिलता मुसाफिर प्यासा मर जाता है । इस कारण वहाँके मनुष्य ऊंटपर सवार होकर उसी बियाबानको पार किया करते हैं, क्योंकि, ऊंट शीघ्रही प्यासा नहीं होता । प्यासकी तीक्ष्णताको बहुत सहन कर सकता है । वहाँके लोग ऊंटपर खाना पीना रखते हैं । वहाँके ऊंटके नाकमें ऐसा बल है कि, वह दूरसे जान लेता है कि, अमुक स्थानपर जल है । जहां कहीं जल होता है चार पांच कोसके अन्तरसे ऊंटकी नाकमें गन्ध पहुँच जाती है ऊंट भी उसी ओर चला करता है । जब पथ छोड़कर ऊंट उसी ओर चलने लगता है तो सवार