कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
by कबीर साहेब
Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)
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Read in contextको उल्लू बना देती हैं। कौसाही बुद्धिमान् और चतुर मनुष्य क्यों न हो पर त्रिया-
चरित्र तथा इनकी धूर्तताके आगे वह मूर्ख तथा अज्ञानके बराबर हैं। यह त्रिया-
चरित्र संसारमें प्रख्यात है, इस कलाको सीखनेके लिये कौन पाठशाला कौन
शास्त्र और कौन गुरु है? स्वयम्ही आपसे आप यह सब गुण उत्पन्न होते हैं।
यह सबका जानने तथा देखनेवाला है। भाग्य प्रत्येकको अपने आप सिखा देता
है। किसी शिक्षककी आवश्यकता नहीं रहती। सब जीव अपनी जातिकी बोली
तथा इन्द्रित चिन्होंको समझते हैं। पशु ऐसे ऐसे विचित्र कार्य करते हैं जिन्हें
कि, देखकर मनुष्यकी बुद्धि चकराती है जैसे चीनके लोगोंकी बोली लेपलेण्डर
और फारसीसियोंकी बोली हबशी नहीं समझते एक कूएँके मेढककी बोली दूसरे
कुएँका मेढक नहीं समझता इसी प्रकार सभी अपनी योनिके अनुरागी होते हैं
उसी भाषाको समझते हैं दूसरीको नहीं जानते।
पुण्यपापके फलका संक्षेप।
७५—इस संसारमें जितने मनुष्य हैं, किसीका आकार किसीसे मेल
नहीं रखता क्योंकि, सबसे पूर्वकर्म पृथक् पृथक् ढङ्गके बने हुये हैं। जैसा कि,
कृष्णचन्द्र और कबीरसाहबने कहा है मनुसंहिता इत्यादिमें लिखा है जो कपड़ा
चुरावे वो कोढ़ी होगा। घोड़ा चुरावे सो लंगड़ा हो। प्रदीप चुरावे वो अन्धा
हो। जो अप्रतिष्ठा सहित प्रदीप बुझावे सो काना हो। जो जल चुरावे वो पन-
डुब्बी हो। जो तेल चुरावे वो पतंग हो। जो हिरण चुरावे वो भेड़िया हो, जो
फल चुरावे सो बन्दर हो। जो पंडितका धन चुरावे सो घड़ियाल हो, अपवाद
लगानेसे मुँहमें दुर्गन्धि हो, रक्त चुरानेसे वनस्पती हो, दुराचारी मतका कीड़ा
होता है। क्रोधित तथा बदला लेनेवाला मनुष्य शेर हो। बहुत भोजन करने-
वाला मनुष्य सूअर हो। जो परस्त्रीके साथ गमन करे वह अन्धा हो। जो वेश्या
गमन करे वह गद्दा हो। जो दूसरेका धन लूटे वह भिखारी हो। जो मनुष्यका
वध करे वह कोढ़ी हो। जो सुवर्णदान करे वह सुवर्ण पावे। जो पृथिवी दान करे
वो हाथी घोड़ा पावे। जो अन्न दान करे तो मनुष्य देह पावे। जो किसीका ऋण
लेकर चुकता न करे तो उसकी स्त्री मर जावे। जो मिष्ठान्न दान करे वह स्वरूप-
मान हो। जो गुरुकी सेवा करे वो पवित्र तथा स्वच्छ हो। जो कोई अपने
आत्मीय स्वजनकी हत्या करे वह नशा खानेवाला हो। जो अपना उच्छिष्ट
भोजन दूसरेको करावे वो कुत्ता बिल्ली हो। जो कोई अपनी विद्या दूसरे को
न सिखावे वो बहरा हो। जो कोई गुप्त दान करे वह अपनी मनोकामना पावे।
जो गायका दान करे वो पवित्र हो। तीर्थ स्थानसे उच्च घरानेमें जन्म ले।