Skip to content
SarvaKosh
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

Page 73 of 1367

Read in context
Page 73

ध्यान करता रहा । तब सत्यपुरुष दयालु होके बोले कि, हे पुत्र ! माँग ! तू क्या वर माँगता है ? जो कुछ तू माँगेगा मैं तुझे प्रदान करूँगा । सत्यपुरुषने दयालु होके ऐसा कहा—तब निरंजनने विनय करके कहा कि, हे प्रभु ! यदि आप दयालु हुए हैं तो मुझे तीनोंलोक भवसागरका राज्य प्रदान कीजिये, जिससे मैं तीनलोक भवसागरकी रचना करूँ और सृष्टि करके रचनाको अपने अधीन करूँ और सारे भवसागरमें मेरा राज्य रहे । (देखो ग्रन्थ कबीरवाणीमें) ।

यह प्रार्थना निरञ्जनकी स्वीकृत हुई और सत्यपुरुषने कहा, हे पुत्र ! जो कुछ तूने माँगा, मैंने तुझे प्रदान किया, पर सृष्टिकी उत्पत्तिका कुल सामान कूर्मजीके पास है । तू उनके पास जा और सृष्टिकी उत्पत्तिका कुल सामान उनसे माँग । जब तू कूर्मजीके समीप जाना तो उनसे अत्यंत विनीत भावसे मिलना और दंडवत् प्रणाम करके अत्यंत नम्रतासे रचनाका सामान माँगना और जब कूर्मजी हर्षपूर्वक देवें तब तुम वह सामान लेके तीनलोक भवसागरकी रचना करना । यह बात सुनके निरञ्जनको अत्यंत हर्ष हुआ और वह आनन्दसे भग्न हो गया कि, अब तो सत्यपुरुषने तीनलोक भवसागरका राज्य हमको प्रदान कर दिया । भौति २ के हर्षमय ध्यान उसके मनमें उत्पन्न हो रहे थे और वह सोचता था कि, अब तो मैं तीनोंलोकोंका राजा हुआ हमारें बराबर दूसरा और कौन है । इसी प्रकार भग्न निरञ्जन पाताललोकको चला ।

सातवाँ प्रकरण

निरञ्जनका कूर्मके पास जाकर तीनों लोक की रचनाकी सामग्री माँगनेका वर्णन

इसी प्रसन्नता तथा उत्सुकताकी अवस्थामें निरञ्जन कूर्मजीके पास पहुँचा और देखा कि, कूर्मजीका शरीर अट्ठानवें करोड़ योजनाका है । इस कूर्मजी को सत्यपुरुष ने रचनाकी कुल सामग्री प्रदान करके भण्डारी बनाया है । रचना की समस्त सामग्री आपहीके पास उपस्थित रहती हैं, जब निरञ्जन कूर्मजीके पास पहुँचा, तो अपने घमंडमें आके कूर्मजीको दंडवत् प्रणाम कुछ न किया और यों कहा कि, हे कूर्मजी ! मुझको सत्यपुरुषने तीनोंलोक भवसागरका राज्य दिया है और कहा है कि, कूर्मजीसे रचनाका सब सामान लो । इस कारण मैं तुम्हारे पास आया हूँ कि, तुम मुझको सृष्टिकी सामग्री दो । यदि तुम मुझे न दोगे तो मैं तुमको

१. देखो परिशिष्ट प्रथम भाग प्रथम अध्याय । २. यह कूर्मजी कछुके आकार के हैं उनके सोलह शिर तथा चाँसठ हाथ हैं यह सत्यपुरुष के पुत्र पाताल में रहते हैं ।