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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

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सत्यलोक सहित सब लोकोंका विवरण पृष्ठ २४६

यह सत्य पुरुषका स्थान है
जाहृत आहृतसे दश असंख्य
लाख योजन ऊपर इसके मध्यमें
शून्याकार है.

<!-- image: A circular diagram with a sunburst pattern of rays. Inside the circle, the word 'सत्यलोक' (Satyalok) is written in Devanagari script. -->

यह सत्य पुरुषका निवास
स्थान है इसीको अमर धाम
कहते हैं. यहींसे कबीर साहब
सत्य पुरुषकी आज्ञा लेकर आते हैं
जीवोंको कालके फन्देसे निकालकर
यहीं ले जाते हैं.

दश असंख्य लाख योजन ऊपर है

आहृत राहृतसे दो असंख्य योजन ऊपर है
राहृत साहृतसे चार असंख्य योजन शून्य ऊपर है
माहृत बाहृतसे पांच असंख्य शून्य ऊपर है
बाहृत हाहृतसे तीन असंख्य योजन ऊपर है
यह हाहृत स्थान लाहृतसे एक अ० यो. ऊ०
यह लाहृत मालकृतसे ग्यारह पालंग योजन ऊपर है
यह जबरुत स्थान मलकृतसे अठारह करोड़ योजना ऊपर है
यह मलकृत पृथ्वीसे साठ सहस्र योजन ऊपर है
यह नासूत पृथ्वीसे ३६ सहस्र यो० ऊ० है
देवताओंकी पुरियां और सिद्धोंके स्थान-
कर्मभूमि....

इस सात नरकोंमें चौरासी कुण्ड हैं
यहीं पापियोंको दंड मिलता है।

<!-- image: A vertical diagram consisting of a series of circles connected by a dotted line. The circles are arranged in a column. The top circle is larger than the others. Below it are several smaller circles. At the bottom, there is a cluster of circles enclosed in a bracket-like shape. -->

सहज द्वीप सहज पुरुषका स्थान है।
अंकुर द्वीप अंकुर पुरुषका स्थान है।
इच्छा द्वीप इच्छा पुरुषका स्थान है।
सोहृङ्ग द्वीप सोहंग पुरुषका स्थान है।
अचित्य द्वीप अचित्य पुरुषका स्थान है।
आरण्य द्वीप अक्षर स्थान सायुज्य मुक्ति
सांक्षरी द्वीप सारूप्यमुक्ति निरञ्जन स्थान
यह वंकुठ विष्णुका स्थान सामीप्यमुक्ति
दह्य अंशका स्थान सालोक्य मुक्ति
पृथ्वी और नासूत स्थानके मध्यमें है।
पृथ्वी

अतसाविलोक.