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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

Page 68 of 1367

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Page 68

दूसरा प्रकरण

सत्यपुरुषके प्रतिनिधि (रसूल)

जिन सत्य पुरुषका विवरण ऊपर किया गया, उनके (पाकरसूल पवित्र अनागत वक्ता ( कबीरसाहब हैं, और उस सत्य पुरुषके प्रतिनिधिमें सब गुण वही हैं जो स्वतःसत्य पुरुषमें हैं, यह और वह एकही है इसमें और उसमें बाल बराबर भी विभिन्नता नहीं है। ज्ञानी लोग दिव्यदृष्टिसे देखते हैं कि, यही पवित्र सत्यपुरुषका प्रतिनिधि समस्त संसारका सच्चा गुरु है और सब अगुवाओं का अग्रगण्य है समस्त पथदर्शकोंको पथ दिखाता है। वह स्त्रीके रज तथा पुरुषके वीर्यसे कदापि उत्पन्न नहीं होता, वह स्वेच्छासे मानुषिकशरीरमें प्रकट होकर मनुष्योंको मुक्ति प्रदान करता है—उसकी आज्ञा सर्व सृष्टिपर है, उसने कई बेर कहा है कि, यदि उसकी इच्छा हो तो वह समस्त संसारको मुक्ति दे दे और उसने समस्त स्वसंवेदमें कहा है कि, मैंही स्वयं सत्यपुरुष हूँ, यहाँ वहाँ मैं ही हूँ, दूसरा कोई नहीं—मैं ही स्वयं सत्यपुरुष और मैं ही स्वयं अपना प्रतिनिधि आप हूँ।

सांसारिक जीवोंके उद्धारके निमित्त मैं दो नामोंसे प्रख्यात होता हूँ मैं स्वतः निजात्मस्वरूपमें स्थित हूँ तथा अन्य सब अनात्म हूँ,

जब सत्यपुरुषकी आज्ञा होती है, तब सत्य कबीर पृथ्वीपर प्रकट होते हैं। आप अपनी इच्छानुसार बालक, युवा वा वृद्धके रूप धारण कर विचरते हैं। न आपका कोई विशेष वेष है, न कोई विशेष रूप है और न आपका कोई विशेष नाम है। आपके नाम अनन्त हैं—पर चारों युगमें आपके चार नाम विशेष रूपसे प्रसिद्ध होते हैं। पहले पहल जब संसार प्रकट होता है उस समय आप पृथ्वीपर आते और मनुष्योंको उपदेश करते हैं, तब आप उस समय अर्थात् सत्ययुगमें सत्य-स्वकृतके नामसे विख्यात होते हैं, उसी स्वकृत तथा सत्यमुकृतजीकी प्रार्थना स्तुति पाँचों वेद और समस्त ऋषि मुनिगण करते हैं और उसकी दया से परमपद को प्राप्त होते हैं। जब दूसरा त्रेतायुग आरंभ होता है तब आप मुनीन्द्रके नामसे प्रसिद्ध होते हैं और द्वापरयुगमें आप करुणामय ऋषि कहलाते हैं और जब द्वापर व्यतीत होके कलियुग आरम्भ होता है तब आप, सत्यकबीर, कबीर साहब, शेख कबीर और सैयद अहमद कबीरके नामसे सुप्रसिद्ध होते हैं और अपना पंथ प्रकट कर और करोड़ों व्यक्तियोंको परमधाम पहुँचाते हैं। पहले तीन युगोंमें आपका पंथ विशेष


१ रसूल शब्दका अर्थ है भेजा हुआ। सत्यपुरुषने सत्यकबीरको, जीवोंको चेताने के लिये भेजा, इसलिये रसूल लिखा और कबीर सत्यपुरुषके स्थानापन्न जगतमें है इसलिये प्रतिनिधि।