Skip to content
SarvaKosh
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

Page 439 of 1367

Read in context
Page 439

मुझको भली भाँति स्मरण है कि, मैंने तौरीत ज़बूर और नबियोंकी पुस्तकें इज्जील इत्यादिमें तो अल्लाका नाम कहीं नहीं देखा केवल कुरानमें देखा है, कुरानके लिखे जाने तथा संसारमें प्रचलित होनेके पूर्वसे अल्लाके नामसे लोग भली प्रकार परिचित थे । अरबमें कितनोंहीका नाम अबदुल्ला था । जब पूर्वसे अल्लाहका नाम है और दृढ़नेसे प्रमाणित हो जावेगा कि, तौरीत ज़बूर इज्जील और कुरानके लिखे जानेसे पूर्व, प्राचीन कालसे लोक अल्लाका नाम जानते और याद करते थे इस कारण अल्लाका नाम वेदसे है । प्राचीनकाल और उत्पत्तिके समयसे अल्लाह है । तो उसके अनागत वक्ताभी उसीके सदाके दरवारी हैं । दावा तो यह है कि, संसारकी उचित बातें वेदसे प्रचलित हुई अनुचित उनके घरकी हैं ।

कुरानका सूक्ष्म सार ।

बिसमिल्लाह अर्रहमाने उर्रहीमो ।

(३) सिपारा (३) सूरत (अलहमरान) (५) रकूअ (५६) आयत उन काफ़िरों ें धोखा दिया अल्लाने धोखा दिया, अल्लाहका न्याय सर्वोत्तम है ( ९ ) रकूअ (८६) आयत, तू कहे कि, हम विश्वास लाए अल्लापर कुछ उत्तरा हमपर जो उत्तरा इबराहीम इसमार्ईल इसहाकपर याकूबपर उसकी संतानपर, जो मिला मूसाको, समस्त नबियोंपर, हम अपने परमेश्वरकी ओरसे उनमें किसीको पृथक् करते हैं । हम उसके आज्ञा पर हैं ।

(४) सिपारा (४) सूरतनसा (५) सिपारा (२०) रकूअ (१३६) आयत जो लोग मुसलमान पुनः उस धर्मसे विमुख हुए फिर मुसलमान पुनः विमुख हुए फिर मुसलमान हुए फिर बढ़ते गये इनकारमें परमेश्वर उनको कदापि क्षमा नहीं करेगा न उनको पथही देवेगा ।

(९) सिपारः (९) सूरत तोबः (३) रकूअ (२३) आयत हुए विश्वासवालों ! वे पकड़ो अपने पिता और जौर भ्राताओंको साथी यदि वे प्रिय रक्खे । कुफ़ विश्वाससे जो लोग साथ करें वही पापिष्ठ हैं ।

(९) सिपारः सूरत अनफाल (३) रकूअ (३०) फिर जब फरेब बनाने लगे काफ़िर कि, तुझको हरावें अथवा मारडालें अथवा निकाल देवें फरेब करते थे, अल्ला भी फरेब करता था । अल्लाका फरेब सबसे उत्तम है ।

(११) सिपारह (१०) सूरत (मुनुस) (१०) रकूअ (९९) यदि तेरा परमेश्वर चाहता तो विश्वास लाते जितने लोग पृथ्वीमें हैं । अब लोगोपर क्या तू बल करेगा कि, हो जावे विश्वासी (१००) किसीको नहीं मिलता