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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

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इसके दर्शन नहीं हुए । पर इसके आधारपर इस्लामकोऔपनिषद कह डाला है इस कारण यहाँ उसे लिखते हैं ।

ॐ अस्मल्ल इल्ले मित्रा दरुणा दिव्याधते इल्लल्ले वरुणो राजा पुरुदुः
हया मित्रा इल्लां इल्लेले इल्लां वरुणो मित्रो तेजकाना ॥ १ ॥ होतारीमद्रो
होतारिमद्रो सुरेंद्राः अल्लो ज्येष्ठं परमं पूर्णं ब्रह्मणे अल्लम् ॥ २ ॥ अल्लो रसूल
महोमदरकं वस्प अल्लो अल्लां आरलांबुकमेकं ऋल्लावकनिस्वातकम् ॥ ३ ॥
अल्लो परानुहतत्त्वः अल्ला सूर्य्यं चंद्रमा सर्वं नक्षत्रा अल्ला अग्नि वायू अल्लां
॥ ४ ॥ अल्लो ऋषीणां सर्वदिव्याम् इंद्राय पूर्वं माया अन्तरिक्षाः अल्लो
पृथिव्यन्तरिक्षं विश्वरूपम् ॥ ५ ॥ दिव्यानि धत्ते इल्लल्ले वरुणोना पुर्दुदु
इल्लाङ्कुर इल्लाङ्कुर इल्लाम् इल्लल्लेतिल्लल्ला ॥ ६ ॥ अप्रल्लं इल्ल इल्ले।
अनादिरूपाय अर्थणीं शामाहम् अल्लां रस हिजनन्या श्रुन्सिद्धजलखुरान् प्रादृष्टं
कुरु करुषपा असुरसंहारणीं हं अल्लो रसूल महम्मद रक्कव रस्म अल्ल अल्लां
इल्ले इल्ले तिर इल्लल्लाः ॥ ७ ॥ सहस्रा वर्तनेनदेव जालो भवति शतावर्तेन
सर्ववश्यो भवति त्रिमधुहू वृत्तेन सर्पपेन वा अत्यस्तवर्तनें सर्वग्रहशान्तिर्भवति ॥
इति अथर्वण संहितायां एकविंशतिद्वारेसप्तविंशतिमुतिःॐ अल्लात्वाःइल्लल्ला
महम्मद रसूल अल्लाः ॐ इल्लाङ्कुरः वर इल्लाङ्कुर वर इल्लाम् इल्लल्लेति ॥
जैसा कि, यह अल्लाह और रसूलकी प्रशंसा करता है । इसीके अनुसार
आरम्भमें लेखनीने लौहपर लिखा । वही आजदिन पर्यन्त बराबर चला आता
है, घट बढ़ नहीं । यद्यपि पहले विस्तारके साथ था और अब संक्षेपतः हो गया
(लाइलाहइल्लल्लाह मुहम्मदुरसूलल्ला) कहा जाता है । जो पहले था वही
आज है । वह जो है उसे संस्कृतमें महामद कहते हैं वही अब मुहम्मद साहिब
हैं । यही मुहम्मद रसूल अल्लाह सृष्टिके उत्पत्तिकालसे लेकर आजपर्यन्त
लगातार मुसलमानोंके गुरुवाई करता चला आता है । इसीने संसारमें अघोर
धर्म वाम मार्ग जैसा इस्लाम पृथ्वीपर प्रचलित किया । मोलवी अमाहुद्दीनका
मुहम्मदी इतिहास और मुहम्मदी शिक्षाका मिलान करके देखो, प्रत्यक्षमें अघोर
धर्म प्रगट है इसी महामद तथा मुहम्मदके जिन परी भूत प्रेत इत्यादि अधीन
रहते हैं ।

इसोसे कुरान है । यह अल्लाह उपनिषद अथर्वण वेदका (२७) अध्या-
यका (२१) मंत्र है ऐसा कोई कहते हैं पर हमने इसे वेदमें नहीं देखा जो
है ऐसा कहते हैं उन वेचारोंको पता नहीं कि, उस वेदमें अध्याय है वा नहीं है ।