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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

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चले । उस समय श्रीविष्णु भगवान् अपना तीर धनुष लेकर शिवजीके पीछे चले जहाँ २ शिवजी गए, वहाँ २ विष्णु भी गए। अपने तीर धनुषसे सतीजीके शरीरको तोड़ते गए । जिन २ स्थानोंपर शतीजीका शरीर गिरा उन उन स्थानोंपर मूर्तियाँ उत्पन्न होगईं । उन स्थानोंपर जो कोई तप जप करे शीघ्र सिद्ध हो जाता है । एक सौ आठ स्थानोंपर वह देह टूट २ कर गिरा, सो समस्त सिद्धस्थान होगा । उन स्थानोंपर लोग मंत्र इत्यादि सिद्ध करते हैं वे शीघ्र सिद्ध पाते हैं और तुरंत सिद्ध हो जाते हैं ।

फिर भोलानाथ महाराजने भस्मासुरको वरदान दिया कि, जिसके शीश पर तू हाथ धरेगा वह तुरन्तही भस्म हो जावेगा । इस दैत्यने चाहा कि, मैं शिवही को भस्म करके पार्वतीको लेलूँ । तब उसके भयसे शिवजी भागे । तब विष्णुने आपका प्राण रक्षा की और भस्मासुरको भस्म किया । इसलिये उस दिनसे वैसे वरदान नहीं देते । ये शिव बड़े दयालु हैं, वर आदि शीघ्रही देदेते हैं ।

निरञ्जनके चार दूत ।

कबीर साहबका वचन है कि, चार दूत सदैव निरञ्जनके दरबारमें उपस्थित रहते हैं, जो आज्ञा तथा उपदेश होते हैं उन्हें तुरंत कार्यमें परिणत करते हैं, समस्त कार्यवाहियाँ तथा काम धाम उन्हींकी आज्ञानुसार होते हैं । ब्रह्मा विष्णु शिव और यम इन्हींको अरबी भाषामें जिव राईल, मेकाईल, इसराफ़ील और इज़राईल कहा है । इसलामके हदीसोंमें इनका विवरण सविस्तार रूपसे किया गया है । परन्तु मैं संक्षेपतः लिखता हूँ कि, हदीस रसूल राबी इब्र अब्बासकी कहावत है कि, जगदीश्वरने आकाशमें अनगिनती देवता बनाए हैं । इनमें चार देवता बड़े हैं । प्रथम जिंवराईल । दूसरे मेकाईल । तीसरा इसराफ़ील । चौथा इज़राईल । इन चारोंको परमेश्वरने पृथक् कार्योंपर नियुक्त किया है । वे सदैव परमेश्वरके अधीन रहते हैं ।

हजरत जिंवराईलका यह काम है कि, जो परमेश्वरकी आज्ञा हो वह पैगम्बरोंके पास पहुँचाया करे । मेकाईलको यह कार्य सौंपा गया कि, वह वृष्टि कर । समस्त संसारको भोजन पहुँचाया करे । इसराफ़ीलके हाथमें नरसिंघा है कि, परमेश्वरकी आज्ञासे फूँके । उसके शब्दसे महाप्रलय हो जाता है । इज़राईल को आत्मा निकालनेकी आज्ञा है । जब इसराफ़ील उत्पन्न हुआ तब परमेश्वरसे बल मांगा कि, सबसे मुझमें अधिक बल हो। निदान समस्त जीवोंसे इसराफ़ीलमें बल विशेष है । जो माँगा सो परमेश्वरने प्रदान किया । इसराफ़ील के शरीरमें जितने बाल हैं प्रत्येकबालमें सहस्रों मुँह और प्रत्येक मुँहमें एक २ लाख जिह्वा