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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

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आचार्य, विश्वामित्र ऋषि, वाशिष्ठ मुनि, हनुमान् देवता, हनुमान् मंत्र, राम-
गायत्री, ऋग्वेद, हरनाम आधार, विष्णवसेन पारिषद, रामानुज वैष्णव ।

दूसरे शिवसम्प्रदायके धामक्षेत्रका वृत्तान्त ।

विष्णुकाञ्ची धर्मशाला, मार्कण्डेय क्षेत्र, इन्द्रधनु सुखविलास, पुरुषो-
त्तम धाम, लक्ष्मी इष्ट, जगन्नाथ उपासी, तुलसी मंत्र, त्रिपुरारि शाखा, वामदेव
आचार्य, सायुज्यमुक्ति, नेत्रद्वारा, हरनाम अहार, यजुर्वेद, अच्युत गोत्र, शुक्ल
वर्ण, वटकृष्ण, परिक्रमा, जलबिम्ब, ऋषि नारद, देवता विष्णुश्याम वैष्णव ।

तीसरे ब्रह्मसम्प्रदायके धामक्षेत्रका वृत्तान्त ।

अवन्तिका पुरी धर्मशाला, बदरिकाश्रम धाम, नैमिषारण्य सुखविलास,
अंकपात्र क्षेत्र, सावित्री इष्ट, ब्रह्मउपासी, विष्णुहंसमंत्र, हंस देवता, सालोक्य-
मुक्ति, मोक्षद्वारा, श्रीकालाचार्य, उदितशाखा, अच्युतगोत्र, शुक्लवर्ण, हरनाम
अहार, परमहंस ऋषि, नारायण पारिषद, अथर्ववेद, माधवाचार्य वैष्णव ।

चौथे सनकादिक सम्प्रदायका वृत्तान्त ।

मथुरा धर्मशाला, क्षेत्रगोमती, वृन्दावन सुख विलास, गोबर्धन परिक्रमा,
द्वारावती धाम, रुक्मिणी इष्ट, गोपालउपासी, हंसगोपालमन्त्र, गोपालगायत्री,
हंसशाखा, सारुप्य मुक्ति, नासिकाद्वारा, सनकादिक आचार्य, नारदमुनि, दुर्वासा
ऋषि, गरुडदेवता, सामवेद, महाप्रसाद, अच्युत गोत्र, शुक्लवर्ण, हरिनाम अहार,
वीमादित्य वैष्णव ।

चारों भाई के धामक्षेत्र ।

माता बरुणावती, पिता अगस्त्य मुनि, गुरुधर्म ऋषि, स्वर्गनगरी, अच्युत
गोत्र, शुक्लवर्ण अनन्त शाखा, सूक्ष्मवेद, निष्काम इच्छा, धाम रङ्गनाथ, सुख-
विलास कोटपाट, हरनाम अहार, परम बदरिकाश्रम क्षेत्र, मठ वैकुण्ठ, लक्ष्मीदेवी,
नारायण देवता, पूजा अक्षयवट, श्रीरङ्गसम्प्रदाय, ओखल खाडा, शून्यस्थान,
सुमेरुपरिक्रमा वीर्यमंत्र ।

सत्तरवाँ प्रकरण

वैष्णवधर्मकी श्रेष्ठता ।

वैष्णवाचार्य ग्रंथ देखकर ये धामक्षेत्र लिखे गए हैं, जो कोई चाहे सो
संस्कृतके वैष्णवाचार्यके ग्रंथको देखकर मिलान करलेवे । इन चार सम्प्रदायोंके
वैष्णव पृथ्वीके देव दूत हैं, इनके रूप तथा आचार व्यवहारको देखकर स्पष्ट प्रगट
होता है कि, वास्तवमें वे लोग देवदूत हैं, मनुष्य नहीं हैं । निरञ्जनके जितने धर्म