कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
by कबीर साहेब
Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)
Page 1303 of 1367
Read in contextपण्डित चण्डित मुण्डित मोहे, राजा रंक नरेश ॥
षट् दर्शन पाखण्ड छ्यानवे, सबी बनाये भेश ॥
कहैं कबीर सो तीर न लागे, विनु सत गुरु उपदेश ॥
८० प्रश्न—देहवानसे विदेह किस प्रकार मिल सकता है ?
उत्तर—जिस शरीरधारीने अपनी देह मिथ्या जान अपनी वासना उठाली वह अवश्य विदेहको प्राप्त होगा ।
८१ प्रश्न—आश्चर्य है कि, विश्वामित्र जैसे ऐश्वर्यमान् महात्मा नवीन सृष्टिके कर्ता हुये वे मुक्त न हों ?
उत्तर—विश्वामित्र आदिकी कथा पढ़नेसे ज्ञात होगा कि, वे अपने २ कर्मोंका फल पाकर और उसे भोगकर फिर अधिकाराखुद हो गये, न तो किसीको वह प्रकाशही मिला न किसीकी स्थितिही हुई जिससे कि, मुक्ति होती है पर वो जो चाहते थे वो उन्हें अवश्य मिला ।
हस्त क्षेत्र ।
८२ प्रश्न—जब सतपुरुषने निरंजनको तीन लोकका राज्य दे दिया तो फिर कबीर साहबका उसके (निरञ्ज) राज्यमें हस्तक्षेप करनेका क्या स्वत्व है ?
उत्तर—वह सर्व शक्तिमान् है जो चाहे सो करे । निरञ्जन को इसलिये राज्य नहीं दिया है कि, जीवोंपर अत्याचार करे । निरञ्जनने सत पुरुषका नाम छिपाकर अपना प्रगट किया तपके बलसे बड़ा प्रबल हो महा अहंकारी बन गया आद्याको निगल गया । कूर्मजीके तीन शिर काट लिये । अक्षरके साथ युद्धकर उसे भगा दिया । योग जीतके साथ युद्ध करने उन्हें मारनेको सन्मुख आया । तीन लोकमें अन्यायद्वारा सब जीवोंको छल और कपटसे बन्धनमें डाल लिया । सत् लोक जानेका मार्ग रोक लिया । ऐसी युक्ति बनाई कि कोई मनुष्य भी किसी प्रकार सत् लोकका मार्ग नहीं पासका । किताबोंके फन्दोंमें सबको फँसाकर सबका सत्य ज्ञान हर लिया । जब सत्य पुरुषने निरंजनका ऐसा अत्याचार देखा तो स्वयम् सत्यलोकसे चलकर जानी, सतमुक्त सत् कबीर आदि नामोंसे प्रगट हो काल पुरुषसे कहा कि, यदि तू अब अवज्ञा करेगा तो तुझे नाश कर दूंगा । कालपुरुष अधीन होकर सतगुरुके चरणोंमें पड़ा अपने अपराधकी क्षमा माँगी ।