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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

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नाशमान पदार्थों के लिये लड़ा करते हैं वे पशु पक्षीसे न्यून नहीं, उनमें मनुष्यता की गंध भी नहीं होती ।

मनुष्य वही है जो पशुधर्मसे रहित शुद्ध मनुष्यधर्मको धारण करने वाला हो । जिस प्रकार चिड़ीमार पक्षियोंको पकड़ २ कर मारता खाता है, उसी प्रकार काल पुरुष सर्व जीवोंको विषयवासनामें फँसाकर मार डालता है ।

मनुष्यको परमत्माने सब जीवधारियोंमें श्रेष्ठ इस कारण बनाया है कि, ये सब जीवधारियोंकी यथार्थ अवस्थाको जानकर यथाशक्ति उनकी रक्षा करे उनसे उनकी शक्ति अनुसार काम ले । इस कारण श्रेष्ठ नहीं बनाया कि, उनको मार मार कर खावे । पिछले अध्यायोंमें भली प्रकार युक्ति और प्रमाणोंद्वारा सिद्ध कर आया हूँ कि, एकही आत्मा सब जीवधारियोंमें व्यापक है, केवल उनको कर्मोंने उनको भिन्न २ रूपोंमें प्रकट किया है । मनुष्यका मुख्य भोजन अंकुरज पदार्थ है बरन् उसमें भी विचार करके अपने लाभदायक पदार्थोंकोही ग्रहण करनेकी आज्ञा है ।

कुरान्में तो ईमान (धर्म) का सार दया बतलाया फिर अन्याय और अत्याचार बतलाना पिशाचोंकी धोखेबाज़ी है ।

यजुर्वेदमें विराट् पुरुषकी व्याख्यामें स्पष्ट लिखा है कि, सब जीवधारी विराट् पुरुषके अस्थि, मांस और चर्म हैं, अंकुरज केश और नख हैं । देखो केश और नखके काटनेसे किसी प्रकारका कष्ट नहीं होता बरन् मांस और हड्डीको काटो तो कष्ट होता है । जो मांस चर्म और अस्थि निकालेगा वह विराट् पुरुषका शत्रु है । सारे मांसाहारी और हिंसक ईश्वरके शत्रु और सदाचारविनाशक हैं वे अवश्य नरकको जायेंगे ।

धर्मोंके इष्टदेव—संसारमें जितने धर्म प्रचलित हैं सबके नियामक ब्रह्मा विष्णु और महेश येही तीन देव हैं । कोई किसी धर्मको क्यों न ग्रहण करे इन तीन देवोंके शासनसे बहिर्गत नहीं होसकता । ईसाईयोंने बड़े परिश्रम और व्ययसे इन तीनों देवोंके औगुणोंको लिखा है उनकी निन्दा करके हिन्दुओंके खिझानेकी किसी युक्तिको भी शेष नहीं रखा है पर उनको यह नहीं मालूम कि उनने कभी इस बातका विचार नहीं किया है कि, आदमका खुदा इन तीनों देवोंसे श्रेष्ठ नहीं था । इबराहीमको जो तीन फिरिश्तः मिले थे वे कौन ? कैसे थे ? वे तीन फिरिश्ते जिन्होंने मुहम्मद साहबका पेट चाक करके शैतानी रक्त निकाला था वे कौन थे ? यदि वे विचार करें तो जान पड़ेगा कि, ब्रह्मादि तीन देवताओंसे भी छोटे थे जितने धर्मवाले हैं सब परस्पर राग द्वेष करके एक दूसरेके इष्टोंकी निन्दा