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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

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इब्रानी और ईसाई दो दूत मानते हैं और उनसे एकको यहवाह मुकद्दसके नामसे पुकारते हैं और उसका नाम बड़ी प्रतिष्ठाके साथ लेते हैं। इस यहवाहने इब्राहीम को आशीर्वाद दिया। इब्राहीमको प्रिय पुत्र इसहाक था। परमेश्वरने आकाश वाणीसे इब्राहीमको आज्ञा दी और कहा कि, ऐ इब्राहीम ! तू अपने पुत्र इसहाक को मेरे नामपर कुरबानी कर। इब्राहीम परमेश्वरकी आज्ञाको मान कर अपने पुत्र इसहाकको लेकर चला और लकड़ियोंको एकत्रित करके अपने प्यारे पुत्रको उसपर बैठाया और हाथमें छुरा लेकर उसको हलाल करने तथा जलाकर कुरबानी करनेके निमित्त प्रस्तुत हुआ। उसी समय आकाशवाणी हुई कि, बस कर, अब तू अपने पुत्रको मत मार। तब उसने जबह नहीं किया और परमेश्वर इब्राहीमका सच्चा प्रेम देखकर बड़ाही हर्षित हुआ।

यह नरमेध यज्ञ वेदकी आज्ञानुसार पहले पश्चिम देशमें इब्राहीमने ही किया, इस इब्राहीमका बेटा इसहाक और इसहाकका बेटा याकूब और याकूबका बेटा यूसुफ था।

उनसठवाँ प्रकरण

यूसुफ पैगम्बरका वृत्तान्त।

इस यूसुफके ग्यारह भाई थे, अर्थात् थाकूबके बारह बेटे थे। यूसुफ मिश्र देशमें गया वहाँका बादशाह फिरऊन था, फिरऊन यूसुफकी सदाचार तथा सुजनताको देखकर अत्यंत हर्षित हुआ और उसे अपने समस्त देशका बड़ा अधिकारी बना दिया, मानो यूसुफ समस्त मिश्रका सन्नाट हो गया। इसके उपरान्त उसके ग्यारह भाई तथा पिता अपनी संतानके सहित मिश्रदेशको गये।

साठवाँ प्रकरण

फिरऊनका वृत्तान्त।

वहाँपर यूसुफकी संतानकी बढ़ती हुई। फिरऊन बादशाह और यूसुफ दोनों मर गये उसके अनेक कालोपरान्त एक और फिरऊन मिश्रदेशके सिंहासन पर बैठा। यह फिरऊन बड़ाही घमंडी तथा दुरात्मा था। उसका नामभी उसके घमंडके कारणही फिरऊन था। उस घरानेके सब फिरऊनही कहलाते थे। उसने देखा कि, इब्राहीमके वंशजों में बड़ी उत्पत्ति हुई तब, वह डरा और यहचिंता करने लगा कि, ये कहीं बलपूर्वक मेरे देशपर अधिकृत न होजावें और मेरा राज्य न