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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

Page 125 of 1367

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Page 125

सत्तावनवाँ प्रकरण

जलप्रलय और नूहकी किस्तीका वर्णन ।

परमेश्वरने नूहसे कहा कि, तू एक नाव बना और अपने बाल बच्चों समेत उसमें चढ़ और सब जीवजन्तु कीड़े मकोड़े इत्यादिके जोड़े २ अपने साथ ले, जिसमें उनकी नसल (वंश) पृथ्वीपर रह न जावे । मैं अब पापियोंको नष्ट करूँगा । नूह आदमकी दशवीं पीढ़ीमें धार्मिष्ठ पुरुष था, उसने ईश्वरकी आज्ञाको मान लिया । जब नूह दूसरे जीवों सहित नावपर चढ़ा, तब उस समय ऐसी बाढ़ आयी कि, समस्त जीव डूबकर मर गये, केवल नूहकी नावपरके सब जीवधारी बच गये विष्णुने (जैसा कि मत्स्यपुराणमें लिखा है) मछलीकी सूरत बनायी और अपनी दोनों सींगोंमें नावको बाँध लिया, जिसमें बाढ़के वेगसे बहकर वह नाव चूर २ न हो जाय । जबतक बाढ़का वेग रहा तबतक नूहकी नावको विष्णुने पकड़ रक्खा जब वह नाव अरारात पर्वतपर ठहर गयी तब विष्णु वैकुण्ठको चले गये । जब पृथ्वी सूख गयी तब सब जीवों सहित नूह पृथ्वीपर आये और खुदाके प्रसन्नार्थ जीवोंको आगमें जलाकर बलिप्रदान और यज्ञ किया । वे जीव जब जले तब उनके शरीरमें धुँवा उठा और उस गन्धकी वासना लेनेके निमित्त खुदा महाराज वैकुण्ठसे पृथ्वी पर उतरे और उस गंधको संधकर अत्यंत प्रसन्न हुए और नूहको आशीर्वाद दिया कि, नह ! तुम बौओ लूनों और प्रसन्नतापूर्वक रहो तथा पृथ्वीपर फँल जाओ फिर विष्णु पछताए कि, अभी तो मैंने सबको नष्ट करदिया पर भविष्यमें ऐसा कदापि नहीं करूँगा । फिर नूहसे यह प्रण किया मैं अपना चिह्न आकाश पर रखता हूँ और प्रण करता हूँ कि, अब पृथ्वीके जीवोंको इस प्रकार नाश नहीं करूँगा । फिर अपने शाङ्गधनुष्यको आकाशपर रख दिया और कहा कि यह मेरा धनुष वृष्टिके समय आकाश पर दिखायी देगा, इस शाङ्गधनुषको देख कर अपनी प्रतिज्ञा मैं याद करूँगा और पृथ्वीपरके रहनेवालोंको वाढसे न मारूँगा । इस प्रकार नूह और उसकी संतानको आशीर्वाद देकर भगवान् वैकुण्ठको चले गये और नूह अपनी संतानों सहित खेती करने लगा ।

अट्ठावनवा प्रकरण

इब्राहीम पँगम्बरका वर्णन ।

नूहकी दशवीं पीढ़ीमें इब्राहीम उत्पन्न हुआ । यह मनुष्य पुण्यात्मा तथा बड़ाही धार्मिक था । उसके सामने ब्रह्मा विष्णु और शिव तीनों प्रगट हुए । जिनको