Skip to content
SarvaKosh
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

Page 1186 of 1367

Read in context
Page 1186

देवने ही मुहम्मदका औतार धारण कर मुसलमानी धर्म चला कर वाममार्गका प्रचार किया है। तंत्र शास्त्र और अघोर धर्ममें संसार प्रचलित किया है। महा-देव तमोगुणके रूप हैं तमोगुणी हैं। यही संसारका मूल है; तमोगुणसेही संसारका सब व्यवहार चल रहा है। इस मुसलमानी धर्मका आचार्य तमोगुण है।

मुसलमान कहते हैं कि,

كُلُّكَ لَأَنْفَعَنَّكَ

अर्थात्—कहता है कि, यदि न होता ऐ मुहम्मद तू, तो न उत्पन्न करता मैं पृथ्वी और आकाशको। प्रायः मुसलमान इस आयतसेही मुहम्मद पर बहुत अभिमान करते हैं। पर सन्तोंकी दृष्टिमें यह कुछ सार नहीं रखता वरन् अति तुच्छ और नीच है। क्योंकि, यह संसार यथार्थमें कुछ भी नहीं, मिथ्या भ्रममात्र है अविद्यासे इसकी उत्पत्ति है, असत्यही सत्य होकर दीख पड़ता है। अज्ञान कहो अथवा तमोगुण अथवा अविद्या सब एकही बात है। अज्ञानसे ही सृष्टि हुई है, अज्ञानकी कुछ श्रेष्ठता नहीं वरन् ज्ञानकी ही श्रेष्ठता है। निर्दयता और अत्याचार अज्ञानका चिन्ह है, तमोगुण बिना निर्दयता अत्याचार आदि आसुरी संपत्ति कुछ भी नहीं। इस (मुसलमानी) धर्मके लोग निमाज रोजा भी पढ़ते करते हैं नियत समय पर निमाज पढ़ना अपना धर्म जानते हैं, पर सब ऐसे निर्दई और कठोर हृदयके होते हैं कि हिंसा करना अपना मुख्य कर्तव्य समझ रखा है। फ़कीरोंमें भी बहुधा ऐसेही हिंसक हैं पर कोई कोई ऐसे भी होते हैं जो हिंसाको अधर्म समझते हैं। काजी और—मुल्ला बहका बहका कर, इस धर्मवालोंसे सब अधर्म करवाते हैं। उन्हींके कहनेसे इस धर्मके लोग ऐसी निर्दयता धारण किये हुये हैं कि, दया लाना अथवा दयाका संकल्प करना भी पाप समझते हैं।

जिस प्रकार हिंदुओंमें उसी प्रकार मुसलमानोंमें भी भजन, भक्ति, जप, तप आदि साधनोंकी बहुतसी युक्तियाँ हैं पर मुसलमान लोग सब धर्म कर्मको केवल जीवहिंसाके कारण मिट्टीमें मिला देते हैं, जीव हिंसा नहीं छोड़ते। यद्यपि इस धर्ममें भी बड़े २ प्रसिद्ध महात्मा तपस्वी, ईश्वर भक्त होगये हैं अब भी कोई कोई ऐसे हैं, जो दिनरात ईश्वरके भजनमेंही लगे रहते हैं, संसारसे कुछ भी सरो-

१ मैंने मुसलमानी पुस्तकोंमें देखा है और शरयी मुसलमान भी कहते हैं कि, जबह किये हुये पशुकी छटपटाहट और उसकी दुःखमय अवस्था को देखकर यदि किसी मुसलमानके मनमें दया आजावे तो वह उसी समय धर्मसे पतित होकर खुदाका गुनहगार बन जाता है। धन्य है ! ऐसे धर्म और खुदा तथा उसके प्रवर्तकों को।