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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

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माया क्या नहीं करती है, सत्यको असत्य और असत्यको सत्य बनाना असम्भवको सम्भव और सम्भवको असम्भव बना देना ही इसका काम है। मायाके कार्यमें बुद्धि कुछ भी निश्चय नहीं कर सकती मायाकी गतिको जान लेना कठिनही नहीं वरन् असम्भव है।

साखी - जाकी गति ब्रह्मै नहिं पायो, शिव सनकादिक हारे।

ताकी गति नर कैसेके पड़हो, कहैं कवीर विचारे ॥

मुहम्मद साहबके मआराज।

मुहम्मद साहब मआराजको गये एक क्षणमेही सारे आकाशका भ्रमण करके पीछे आगये। पीछे आने पर लोगोंसे अपना सबहाल कहा, किसी २ ने तो मान लिया पर बहुतोंने न माना। सुलतान रुमने तो इस बातके ऊपर तनिक भी विश्वासही नहीं किया। मुहम्मदसाहबकी बातको बिलकुल झूठ समझा बहुत दिनोंतक ऐसाही अविश्वासी बना रहा। एक दिन एक फकीर बादशाहके सामने आकर कहने लगा कि, ईश्वरमें सब शक्ति है वह जो चाहे दिखलावे, जो चाहे सो करदे। आप मुहम्मद साहबके मआराज पर क्यों नहीं विश्वास लाते? मुहम्मद साहबका मआराज बहुतही ठीक है। उस फकीरने बहुत प्रकार बादशाहको समझाया पर बादशाहने एक भी न मानी, उस फकीरने बादशाहसे कहा कि, पानीका एक बड़ा बरतन मँगवाओ। बरतन मँगवाया गया फकीरके कहनेसे उसमें पानी भरकर मैदानमें रखवा दिया गया। उसने बादशाहसे कहा कि इसमें अपना माथा डुबाकर निकाल लो। दरबारी लोग चारों तरफसे घेरकर खड़े थे, बादशाहने जलमें शिर डालके तुरतही निकाल लिया। शिर निकालतेही उस फकीरके ऊपर क्रोध करके बहुत झुंझलाया कहा कि, इस फकीरने मेरे ऊपर बहुत कष्ट डाला था। फकीरने कहा आपके सब आदमी यहाँ खड़े हैं, मैंने आपको कुछ भी नहीं किया, मैं अलग खड़ा था इन लोगोंसे पूछ देखिये। लोगोंने भी कहा, हां हुजूर! यह फकीर तो अलगही खड़ा है, इसने कुछ भी नहीं किया। अपने आदमियोंकी यह बात सुनकर बादशाहको बड़ा आश्चर्य हुआ कहने लगा कि, मैंने जबपानीमें शिर डुबोया उस समय देखा कि मैं स्त्री होगया हूँ एक मैदानमें इधर उधर फिर रहा हूँ, कोई आगे है न कोई पीछे। वहाँसे थोड़ेही दूर पर खेतिहर लोग खेतीका काम कर रहे थे, उसी (स्त्रीके) रूपमें मैं उन लोगोंके पास गया। उन लोगोंने मुझे अकेला लावारिस जानकर अपने गाँवमें चलनेको कहा, वहाँ पहुँच कर एक युवकके साथ मेरा विवाह कर दिया, मैं उसके साथ रहने लगा। उसी अवस्थामें बहुतसे लड़के और लड़कियाँ