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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

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भेद जानता है, कभी धोखेमें नहीं आता। यहाँ पर मैं कई एक दृष्टान्त लिखता हूँ, जिससे लोगोंको संसारकी असत्यता प्रमाणित हो।

प्रथम दृष्टान्त।

सन् १८५७ में जब कि, हिंदुस्तानमें राज विद्रोह हुआ था, दिहली शाह अपराधी ठहराये जाकर शहरसे निकाल दिये गये थे। शहर लूट लिया गया था। उसी समय, महाराजा कपूरथलाके दीवान, रामजसमल नामक खत्रीको एक पुस्तक, लूटमें मिली थी जो स्वयम् शाहजहाँ बादशाहके हाथकी लिखी हुई थी, उसमें एक बात इस प्रकार लिखी थी।

बादशाह लिखता है कि एक दिन एक बाजीगर नाना प्रकारके कौतुक दिखाने वह एक तलवार लेकर आकाशकी ओर उड़ गया। ऊपर जानेके समय वह कहता गया कि "मैं खुदाके साथ लड़ाई करने जाता हूँ"। थोड़ी देरमें देखतेही देखते, वह आखोंसे छिप गया। अधिक समय न लगा होगा कि, ऊपरसे उसका धड़ (जैसे, हाथ, पोंच, आदिसे लेकर समस्त शरीरके) एक एक टुकड़े होकर नीचे गिर गया। अब उसकी स्त्रीने कहा कि, मेरा पति मर गया है, मैं सती होऊँगी। बादशाह तथा अनेक लोगोंने बहुत समझाया पर स्त्रीने एककी भी न मानी, लकड़ियोंका ढेर लगाकर अपने पतिके अंगोंको लेकर सती होगई। उसके जल जानेके पीछे थोड़ी देर बाद बाजीगर आनन्दमें भग्न नीचे उतरा। अपनी स्त्रीको न देखकर बादशाहसे अर्जकी कि, मेरी स्त्रीको बुलवा दिया जाय। बादशाहने कहा कि, तेरी स्त्री तो तेरी लाशके साथ जलकर राख होगई, पर उस बाजीगरने एकका भी कहना न माना। अन्तमें अपनी स्त्रीको ऊंचे शब्दसे पुकारने लगा, तो वह स्त्री बादशाही अटारीपरसे बोली कि, मैं महलमें हूँ। उसने पुकारा कि, चली आ। वह आनन्द पूर्वक हँसती हुई आगई।

बाजीगरका यह कौतुक देख बादशाह प्रसन्न हुआ। उसे बहुत कुछ पारितोषिक देकर बिदा किया।

द्वितीय दृष्टान्त।

सन् १८३० ई० में मैं अपनी जन्मभूमि आजमगढ़में थे। वह मेरे विद्यो-पार्जनका समय था। आजमगढ़में मच्छर नहीं थे। लोगोंसे पूछनेपर लोग कहते कि, यहाँके मच्छरोंको एक बाजीगरने बांध दिया है। मैंने पूछा कि, किस प्रकार? लोग कहते कि, एक समय यहाँके राजाके पास एक बाजीगर आया। उस समय राजा अपने राजमहलमें था। राजाको खबर पहुँची तो राजाने कहा कि, इस समय बाहर निकलनेसे मच्छर बहुत दुख देंगे। क्योंकि, मेरे शहरमें मच्छर