कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
by कबीर साहेब
Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)
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Read in contextउनके पेटसे मनुष्यके हाथ पग अथवा कभी कभी पूरा आदमी अथवा छोटा लड़का निकल पड़ा है इसी प्रकार छोटे बड़े पशु भी बहुत निकले हैं। इससे सिद्ध होता है कि, मछली सब कुछ खाती है। अब विचार करने योग्य है कि जिसने मछली खाई उसने हलाल खाया कि, हराम।
कुत्ता खाया — प्रायः ऐसा भी दखा गया है कि, शहरके कसाई लोग अशुद्ध पशुओंके मांस और कभी कभी मनुष्यके मांसको भी बकरेके मांसके साथ मिलाकर बेच देते हैं लोग उनको मोल ले लेकर खा जाते हैं अस्तु, आठ बरसके लगभग हुए मैंने सुना था कि, लखनऊमें एक सर्कारी मुलाजिम चपरासी अथवा खलासी आदिमें से किसीने कसाईकी दूकानसे मांस ला पकाकर खालिया वह बहुत बीमार हो गया। डाक्टरके पास दवाई कराने गया, डाक्टरके पूछने पर उसने बतलाया कि, अमुक कसाईकी दूकानसे मैंने मांस लेकर खाया था। डाक्टर साहबने अपनी बुद्धिसे विचार किया कि, बकरेके गोश्त में तो यह बात नहीं होती जान पड़ता है कसाईने किसी दूसरे प्रकारका मांस दिया है। कसाईके घर जाकर तलाशी ली तो ठाँव २ पर कुत्तेको खाल पाई, दरियाप्त करनेसे मालूम हुआ कि, यह कुत्तों को ही मार २ कर चुपचाप बेचा करता है।
परमात्माने सब जीवधारियोंके ऊपर मनुष्यको राजा बनाया है न्यायी राजाके लिये स्वर्ग, अन्यायियोंके लिये घोर नरक होता है।
गलत यह भी — मुसलमान कहते हैं कि, यदि कलमा पढ़कर जबह करें तो हलाल होता है जीवधारी खुदाको पहुँचता है, अगर कलमा पढ़कर बिन व्याही स्त्रीके साथ व्यभिचार करे तो गुनाह नहीं है। मैं इस बातका कभी विश्वास नहीं कर सकता। अगर इस कलमेमें यह शक्ति होती तो कलमा पढ़कर चोरी करने वालेको पुलिस गिरफ्तार न करती। कलमा पढ़कर खून करनेवालेकी फाँसी न मिलती, कलमा पढ़कर डाँका मारता, कोई न पकड़ता इस कारण ये सब बातें बिलकुल झूठ हैं, मूर्खोंमें ठगी पसारनेकी बातें हैं। इसमें कोई प्रमाण नहीं कि, कलमा पढ़कर बध करनेसे जीव स्वर्गको चला जाता है, कलमा पढ़कर व्यभिचार करनेसे निष्पाप रहता है। यदि कलमेमें यह सामर्थ्य है तो चोरी क्या और डाँका आदि पुलिससे अधिक बलवान हैं? कलमामें यह सामर्थ्य बतलाना राक्षस, भूत यक्षोंके समान धोखा देना है। हां इतना है कि, मुहम्मद साहबके समयमें इस कलमामें बड़ी ताकत थी। क्योंकि, रक्तपात करने, निष्पाप जीवोंकी हत्या करने, चोरी और डाँका मारनेसे भी उनके समयमें अरबके लोग पकड़े नहीं जाते थे मुहम्मद साहबने रक्तपातकी आज्ञाही दी थी।