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कबीर कृष्ण गीता

कबीर कृष्ण गीता

Kabir Krishna Gita

by युगल आनंद विहारी

Source: Kabir Krishna Gita - Yugal Anand Vihari · Archive.org (origin)

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Devanagarihipublished168 pages

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अनुक्रमणिका.

७

विषय.पृष्ठ.
मनका वर्णन-मनकी ४०
प्रकृति. ....५३
गुरु और गुरुओंका वर्णन ५४
चौरासीका वर्णन ....५९
भीन भक्षककी गतिका
वर्णन ....५६
जीव बधनेका पाप ....५७
कबीरसाहबसे दर्शन देनेके
लिये सब देवताओंका
प्रार्थना करना. ....५८
कापिलमुनिका पान परवाना
लेना ....५९
रावणका वृत्तान्त ....६०
कलि युगके धर्मका वर्णन६१
पतिव्रता और व्यभिचारि-
णीके लक्षण और कर्तव्य ”
राजा दण्डपालके पुत्रोंकी
कथा ( पतिव्रता और
व्यभिचारीके दृष्टान्त )६३
कथाका सार दृष्टान्तका
अध्यात्मिक अर्थ ....७०
निर्गुण भक्तिकी महिमा ”
अर्जुन और कबीर संवाद ७१
युधिष्ठिरका आरती चौका
करना. ....७३
कबीर साहबका देवता तथा
विषय.पृष्ठ.
युधिष्ठिरको परवाना देकर
लोकको जाना. ....७४
निरंजन और त्रिदेवका
सम्वाद शिवादिदेवका
कोप करना ....७५
कृष्णको निरंजन शिवके
कोपसे बचानेके लिये
कबीरका प्रकट होना
और शिवका भस्म करना ७९
सनकादिका शिवका जिला-
नेके लिये प्रार्थना करना ८१
सनकादि और विष्णुका
सम्वाद वेदादिकी उत्पत्ति ८२
औतारोंकी कथा ....८९
गुरुभक्तिकी महिमा ....९३
गरुडकी चेतना गरुड और
कबीर सम्वाद ....९४
कृष्ण गरुड सम्वाद ....९९
शुकदेवकबीरसम्वाद ....१०२
कृष्ण कबीर सम्वाद ....१०४
कबीरका अपने पन्थकी
बात कृष्णसे कहना ....१०९
अवतारोंमें सर्वश्रेष्ठ औता-
रका नाम ....११४
तीनों गुण तथा त्रिगुणा
त्मक भक्तिका वर्णन ”