ज्ञानयोग (स्वामी विवेकानन्द - हिन्दी अनुवाद)

ज्ञानयोग (स्वामी विवेकानन्द - हिन्दी अनुवाद)
Jnana Yoga - Swami Vivekananda (Hindi)
by स्वामी विवेकानन्द
DevanagariHindipublished332 pages
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ब्रह्म और जगत् १६५
चाहिये—इस अनन्त सत्ता, ज्ञान और आनन्द की चरम उन्नति—एकदेशीय उन्नति नहीं। हमे चाहिये सभी बातो की समान उन्नति। बुद्धदेव के समान महान् हृदय के साथ महान् ज्ञान का योग होना सम्भव है। मै आशा करता हूँ, हम सभी उस एक लक्ष्य पर पहुँचने की प्राणपण से चेष्टा करेंगे।