जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)
Jataka Kathayen (Authentic Hindi Translation from Pali)
by भगवान बुद्ध / पालि त्रिपिटक
Source: जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद) · हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग · 1956 (origin)
DevanagariHindipublished479 pages
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कोसिय ] ७५
ली। अब मैं ऐसा नहीं कर सकती। आचार्य के प्रति गौरव होने से उसने
पाप-कर्म करना छोड़ दिया और शीलवान् हो गई।
उस ब्राह्मणी ने भी सोचा कि अब मुझे सम्यक् सम्बुद्ध ने जान लिया।
उसने भी फिर शास्ता के प्रति गौरव का भाव होने से दुराचार नहीं किया।
शास्ता ने यह धर्मदेशना ला जातक का मेल बैठाया। उस समय के
पति-पत्नी अब के पति-पत्नी थे। आचार्य मैं ही था।