जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)
Jataka Kathayen (Authentic Hindi Translation from Pali)
by भगवान बुद्ध / पालि त्रिपिटक
Source: जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद) · हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग · 1956 (origin)
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प्रहार लगाकर, केसो से पकड़कर, खींचकर कोहनी से पीटना। उसी समय
उठकर वह काम करने लगेगी।" .
उसने 'अच्छा' कह स्वीकार कर कथनानुसार ओषधि बना कहा—भद्रे !
यह ओषधि पी।'
“यह ओषधि तुझे किसने कही ?”
“आचार्य ने, भद्रे !”
“इसे ले जाओ, नहीं पीऊँगी।”
ब्राह्मण ने कहा, तू स्वेच्छा से नहीं पीएगी। रस्सी लेकर बोला, या तो
रोग के अनुसार दवाई पी अथवा यवागु-भात के अनुसार काम कर।
इतना कह यह गाथा कही—
यथावाचाय भुञ्जस्सु यथाभुतञ्च व्याहर,
उभयं ते न समेति वाचा भुतञ्च कोसिये ॥
[ जैसे कहती है, वैसे दवाई पी, अथवा जैसे खाती है वैसे काम कर,।
कोसिये ! तेरी वाणी और तेरे भोजन का मेल नहीं बैठता ।]