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जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

Jataka Kathayen (Authentic Hindi Translation from Pali)

by भगवान बुद्ध / पालि त्रिपिटक

Source: जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद) · हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग · 1956 (origin)

DevanagariHindipublished479 pages

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बन्धन ] ३६
इस समय नही बोलना चाहिए, इस प्रकार यह मुर्गा समय असमय नहीं जानने
के कारण ही मृत्यु को प्राप्त हुआ ।
यह कथा सुना बोधिसत्त्व यावत आयु जीवित रहकर कर्मानुसार परलोक
सिधारे। शास्ता ने यह धर्म-देशना ला जातक का मेल बैठाया ।
उस समय असमय शोर मचानेवाला मुर्गा यह भिक्षु ही था। शिष्य
बुद्ध-परिषद हुए। आचार्य्य तो मै था ही ।
१२०. बन्धनमोक्ख जातक
"अबद्धा तत्थ बज्झन्ति" यह (धर्मोपदेश) शास्ता ने जेतवन में रहते
समय चिञ्चमाणविका के बारे में कहा। उसकी कथा बारहवें निपात में
महापदुम जातक¹ में आएगी। उस समय शास्ता ने 'भिक्षुओ ! चिञ्च माण-
विकाने न केवल अभी मुझ पर झूठा इल्जाम लगाया है, पहले भी लगाया
है' कह पूर्व-जन्म की बात कही—
ख. अतीत कथा
पूर्व समय में बाराणसी में ब्रह्मदत्त के राज्य करने के समय बोधिसत्त्व
पुरोहित के घर में जन्म ग्रहण कर सयाना होने पर पिता के मरने के बाद
उसी राजा का पुरोहित हो गया।
¹ महापदुम जातक (४७२) ।