जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)
Jataka Kathayen (Authentic Hindi Translation from Pali)
by भगवान बुद्ध / पालि त्रिपिटक
Source: जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद) · हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग · 1956 (origin)
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जेतवन पहुँच, शास्ता की वन्दना तथा पूजा करके एक ओर बैठा । "चिर-
काल के बाद आये ?" पूछे जाने पर उसने भगवान को वह सब हाल कहा ।
शास्ता ने 'उपासक ! तुम्हारी तो चिरकाल से सदाचारिणी है, लेकिन तूने
न केवल अभी किन्तु, पहले भी उसकी परीक्षा की है' कह पूर्वजन्म की कथा
कही-
ख. अतीत कथा
पूर्वकाल मे वाराणसी मे ब्रह्मदत्त के राज्य करने के समय, बोधिसत्त्व
जगल मे वृक्ष-देवता होकर उत्पन्न हुए। उस समय वाराणसी मे एक दुकान-
दार उपासक था इत्यादि कथा वर्तमान कथा के सदृश ही है। हाँ, परीक्षा
करने के लिए उसने जब लडकी को हाथो से धरा, तो लडकी ने रोते रोते यह
गाथा कही-
यो दुक्खफुट्ठाय भवेय्य ताण
सो मे पिता दूभि वने करोति,
सा कस्स कन्दामि वनस्स मज्झे
यो तायिता सो सहसा करोति ॥
[ कष्ट मे पडने पर, जिसे त्राता होना चाहिये, वही मेरा पिता जगल म
विश्वास-घात कर रहा है। सो मे जगल मे किसे (सहायता के लिये) बुलाऊँ ?
जो त्राता है, वही दुस्साहस कर रहा है।]
यो दुक्खफुट्ठाय भवेय्य ताण का अर्थ है कि जो शारीरिक अथवा मान-
सिक दुख से पीडित का त्राण करता है, परित्राण करता है, तथा प्रतिष्ठा
का कारण होता है। सो मे पिता दूभि वने करोति का अर्थ है कि वह दुख से
परित्राण करनेवाला मेरा पिता ही यहाँ इस प्रकार का मित्र-द्रोही कर्म करता
है, अपनी निज की पुत्री (के शील) को ही लांघना चाहता है। सा कस्स
कन्दामि का मतलब है कि किसके पास रोऊँ ? कौन मुझे बचायेगा ?
यो तायिता सो सहसा करोति, का अर्थ हुआ कि जो पिता मेरा त्राता है,
रक्षक है, आश्रय दाता होने योग्य, वह पिता ही दुस्साहस कर रहा है।