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जपजी साहिब (श्री गुरु नानक देव जी - मूल बाणी एवं हिन्दी अनुवाद)

जपजी साहिब (श्री गुरु नानक देव जी - मूल बाणी एवं हिन्दी अनुवाद)

Japji Sahib of Guru Nanak Dev Ji with Hindi Commentary

by श्री गुरु नानक देव जी

DevanagariHindipublished56 pages

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JAPJI SAHIB HINDI SIKHIZM.COM
सलोक ॥
पवण गुरू पाणी पिता माता धरत महत ॥
दिवस रात दुए दाई दाया खेलै सगल जगत ॥
चंगिआईआ बुरिआईआ वाचै धरम हदूर ॥
करमी आपो आपणी के नेड़ै के दूर ॥
जिनी नाम धिआया गए मसकत घाल ॥
नानक ते मुख उजले केती छुटी नाल ॥१॥
सलोक ॥ समस्त सृष्टि का गुरु पवन है, पानी पिता है, और पृथ्वी
बड़ी माता है। दिन और रात दोनों धाय एवं धीया (बच्चों को
खिलाने वाले) के समान हैं तथा सम्पूर्ण जगत् इन दोनों की गोद में
खेल रहा है। शुभ व अशुभ कर्मों का विवेचन उस अकाल-पुरुष
के दरबार में होगा। अपने शुभाशुभ कर्मों के फलस्वरूप ही जीव
परमात्मा के निकट अथवा दूर होता है। जिन्होंने प्रभु का नाम-
सुमिरन किया है, वे जप-तप आदि की गई मेहनत को सफल कर
गए हैं। गुरु नानक देव जी कथन करते हैं कि ऐसे सद्प्राणियों के
मुख उज्ज्वल हुए हैं और कितने ही जीव उनके साथ, अर्थात्
उनका अनुसरण करके, आवागमन के चक्र से मुक्त हो गए हैं॥
१॥
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