जपजी साहिब (श्री गुरु नानक देव जी - मूल बाणी एवं हिन्दी अनुवाद)
Japji Sahib of Guru Nanak Dev Ji with Hindi Commentary
by श्री गुरु नानक देव जी
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का प्रकाश रहता है। परमात्मा का नाम सुनने से समस्त दुखों व
दुष्कर्मों का नाश होता है॥ १०॥
सुणिऐ सरा गुणा के गाह ॥
सुणिऐ सेख पीर पातिसाह ॥
सुणिऐ अंधे पावहे राहो ॥
सुणिऐ हाथ होवै असगाहो ॥
नानक भगता सदा विगास ॥
सुणिऐ दूख पाप का नास ॥११॥
नाम सुनने से गुणों के सागर श्री हरि में लीन हुआ जा सकता है।
नाम-श्रवण के प्रभाव से ही शेख, पीर और बादशाह अपने पद पर
शोभायमान हैं। अज्ञानी मनुष्य प्रभु-भक्ति का मार्ग नाम-श्रवण
करने से ही प्राप्त कर सकते हैं। इस भव-सागर की अथाह गहराई
को जान पाना भी नाम-श्रवण की शक्ति से सम्भव हो सकता है। हे
नानक ! सद्-पुरुषों के अंतर में सदैव आनंद का प्रकाश रहता है।
परमात्मा का नाम सुनने से समस्त दुखों व दुष्कर्मों का नाश होता
है।। ११।।
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