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इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

by बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta)

Source: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (origin)

Devanagarihipublished250 pages

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गाय, कूत्ता, कौवा आदि को पहले भोजन देना बाद में आप खाना। अतिथि यज्ञ = बिना बुलाये, बिना सूचना के विद्वान्, सन्यासी या अन्य जन गृह पर आये तो उसे भोजन कराकर आप भोजन पायें।

उपरोक्त पाँच यज्ञों को गृहस्थ जीवन में नित्यप्रति अवश्य ही करने चाहिए। जिन परिवारों में गृहस्थ में यह पाँच यज्ञ कर्म नित्य होते हैं उस जगह शान्त, जीवन, धन, यश और ऐश्वर्य की दिन प्रतिदिन वृद्धि होती है।

अग्नौ प्रास्ताहुतिः सम्यगादित्यमुपतिष्ठते।
आदित्याज्जायते वृष्टिवृष्ट्यर्न् ततः प्रजाः॥

मनु ३/७६

अर्थ- अग्नि में डाली आहुति आदित्य को पहुँचती है और सूर्य से वृष्टि होती है, और वृष्टि से अन्न, अन्न से प्रजा होती है।

मन्त्र पाठ के पश्चात् यज्ञ में घृत अथवा हवि की आहुति देते हैं। आहुति देने के पश्चात् 'इदन्मम' का उच्चारण करते हैं जिसका अर्थ है 'यह मेरा नहीं'।

एक यांजक इदन्मम कहकर यज्ञाग्नि को हवि देता है। वह यज्ञाग्नि उस हवि को अपने ही पास न रखकर इदन्मम कहती हुई ज्वालाओं को देती है और वह ज्वालाएँ याजक की दी हुई हवि को अपने पास नहीं रखती वह भी इदन्मम कहती हुई गगन मण्डल को दे देती हैं। वह गगन मण्डल उस हवि को अपने पास न रखकर इदन्मम का उच्चारण करता हुआ मेघों के अपेग कर देता है और वह मेघ उस हवि को सब के समान उपयोग के अधिकार की वस्तु समझ कर अपने पास न रखकर वर्षा की जल धारा के साथ इदन्मम का मधुर संगीत गा-गा कर नसुन्धरा को सौंप देता है।

इच्छानुसार सन्तान

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वीरेन्द्र गुप्तः

CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri