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इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

by बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta)

Source: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (origin)

Devanagarihipublished250 pages

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गुना फल मिलता है, जो तीन मिलकर उपासना करते हैं उन्हें हजार गुना फल मिलता है, और जो इससे अधिक मिलकर उपासना करते हैं उनको अनन्त फल मिलता है।

गोलडसटकर साहब पैरिस अर्थात् फ्रांस देश निवासी अपनी (वायविल इन इण्डिया) में लिखते हैं । सब विद्या और भलाई का भण्डार आर्यावर्त देश है। और विद्या तथा मत इस देश से फैले हैं। और परमात्मा की प्रार्थना करते हैं कि हे परमेश्वर ! जैसी उन्नति आर्यावर्त देश की पूर्व काल में थी वैसीही हमारे देश की कीजिये।

जो उन्नति करना चाहो तो 'आर्य समाज' के साथ मिलकर उसके उद्देश्यानुसार आचरण करना स्वीकार कीजिये नहीं तो कुछ हाथ न लगेगा। क्योंकि हम और आपको अति उचित है कि जिस देश के पदार्थों से अपना शरीर बना, अब भी पालन होता है, आगे भी होगा, उसकी उन्नति तन, मन, धन से सब जने मिलकर प्रीति से करें। इसलिये जैसा आर्य समाज आर्यवर्त देश की उन्नति का कारण है वैसा दूसरा नहीं हो सकता।

सत्यार्थ प्रकाश एकादशसमुल्लास
सब प्रकार से अपनी उन्नति करना चाहो तो आर्य समाज के सत्संगों में अवश्य जाया करो।

★★★

इच्छानुसार सन्तान

२०२

वीरेन्द्र गुप्तः

CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri