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इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

by बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta)

Source: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (origin)

Devanagarihipublished250 pages

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भोजन

बच्चों को एक बादाम दूध में घिस कर नित्य चटाना उत्तम है। बच्चों को कम से कम ५ नग मुनक्का नित्य सेवन करानी चाहिए। मुनक्का से शक्ति बढ़ती है और शरीर में रक्त उत्पन्न होता है। बच्चे को अन्न कम से कम १॥ या २ वर्ष के पश्चात् ही देना उत्तम है।

बच्चों को दिन में एक बार या दूसरे दिन सुहागे की खील १ रत्ती दूध में घोलकर देने से पेट ठीक रहता है और यह बच्चों का कैलिशियम है।

बच्चों को ठण्ड का विकार हो जाने पर जायफल और केशर जल में घिस कर दिन में दो बार देना चाहिए। अथवा देसी घी में जायफल घिस कर सीने पर मलना भी उत्तम है।


रक्षा

बच्चों की रक्षा का भार माता-पिता ही पर है। बच्चों को खोटी संगत, खोटे अध्यापक, खोटे सेवक और दुराचारी जनों से सदैव बचाते रहना चाहिए। बच्चों को नाच रंग, श्रृंगारित खेल तमाशे तथा अन्य दूषित वातावरण वाले स्थानों में नहीं भेजना चाहिए तथा साथ भी न ले जाना चाहिए। इससे बच्चों का ब्रह्मचर्य खण्डित हो जाने का भय है। बच्चों के वस्त्र पर मौहल्ले का नाम तथा मकान नम्बर और पिता का नाम लिखवा देना चाहिए, जिससे बच्चा खो जाने पर सुगमता से कोई भी उसे उसके वस्त्र पर लिखे पते पर पहुँचा दे।

इच्छानुसार सन्तान

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वीरेन्द्र गुप्तः

CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri