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इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

by बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta)

Source: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (origin)

Devanagarihipublished250 pages

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जन्म समय

प्रसव के पश्चात् स्त्री को निम्नलिखित योग दस बारह दिन तक देने से शरीर की समस्त व्याधियों से छुटकारा मिल जाता है।

पीपल छोटी १॥ तोला गाय के कच्चे दूध में भिगो दें इस दूध को दूसरे दिन बदल देना चाहिए इसी प्रकार १० दिन तक पीपलें दूध में भीगी रहें। १० दिन पश्चात् जल से धोकर मोटे कपड़े से भली प्रकार मसल कर पीपलों के दाने निकाल लें। इसके अभाव में ६४ प्रहरी पीपल के चूर्ण का प्रयोग कर सकते हैं।

उपरोक्त पीपल के दाने ६ माशा, स्वर्ण भस्म ३ रत्ती, रजत भस्म ६ रत्ती, इन तीनों वस्तुओं को खरल में डालकर घोटें जब बारीक होकर एक हो जायें तो इसकी २-२ रत्ती की मात्रा से पुड़ियाँ बनालें प्रसव के पश्चात् शरद् ऋतु में प्रातः सायं और ग्रीष्म ऋतु में केवल प्रातःकाल मधु में मिलाकर सेवन करायें।

बालक को स्वच्छ कर उष्ण जल से स्नान कराकर पिता अपनी गोद में लेकर बालक की जीभ पर घृत और मधु मिलाकर सोने की शलाका से (३%) अक्षर लिखें और दहिने कान में (वेदोसीति) तेरा गुप्त नाम वेद है ऐसा कहें। इस जातकर्म (जन्म समय) के संस्कार का विवरण संस्कार विधि में देखें और वैसा ही करें।

प्रसूतिका को प्रथम दिन आवश्यकता पड़ने पर केवल साँठ ३ माशा, अजवायन १॥ माशा, देसी पान १ नग, २॥ सेर जल में डाल कर दो उबाल का देना चाहिए और निरन्तर १० दिन पर्यन्त यही जल पीने को देना चाहिए ठंडा या गर्म ऋतु अनुसार तथा इच्छा पर निर्भर है।

इसके पश्चात् दो उबाल का सादा जल १५ दिन तक दें, फिर सादा जल में लोहे की किसी वस्तु को जिस पर जंग आदि न लगी हो लेकर १० बार अग्नि में तपाकर जल में बुझायें

इच्छानुसार सन्तान

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वीरेन्द्र गुप्तः

CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri