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इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

by बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta)

Source: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (origin)

Devanagarihipublished250 pages

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चित्रा नक्षत्र- चित्रा नक्षत्र का चित्त (हृदय) से विशेष सम्बन्ध है। चित्रा नक्षत्र में गर्भाधान की हुई सन्तान के अन्दर दूसरे को अपनी ओर आकर्षित कर लेने की विशेष शक्ति होती है। वह अपने शत्रुओं के हृदय सुगमता से जीत लेता है। दूसरे चित्रा नक्षत्र का बालक युद्ध में भी अपने शत्रुओं को परास्त कर विजयी होता है। यह नक्षत्र क्षत्रियों और सैनिकों को गर्भाधान करने के लिए अति उत्तम है। चित्रा नक्षत्र का बड़ा महत्व है। वह अपने शत्रुओं को रौंदता हुआ विजय को प्राप्त करता चला जाता है। सचमुच जो क्षत्रिय विद्वान् चित्रा नक्षत्र में गर्भाधान करता है उसकी सन्तान शत्रुओं पर विजय ही प्राप्त करती चली जाती है।

नक्षत्रों का सूर्य से घनिष्ठ सम्बन्ध है। गर्भाधान के लिए जो नक्षत्र चुना हो यदि उस नक्षत्र से युक्त सूर्य भी हो तो नक्षत्र की विशेषता कई गुना अधिक हो जाती है।

जिस प्रकार मास के दो पक्ष होते हैं, जिसमें से एक पक्ष में चन्द्र की कला का क्षय होता है और दूसरे पक्ष में चन्द्र की कला में वृद्धि होती है। इसी प्रकार वर्ष के भी दो पक्ष हैं। एक पक्ष में सूर्य की कला क्रमशः क्षय होती है और दूसरे पक्ष में वृद्धि। इसके एक पक्ष को उत्तरायण कहते हैं जिसमें सूर्य कला में वृद्धि होती है और दूसरे पक्ष को दक्षिणायन कहते हैं जिसमें सूर्य की कला का क्षय होता है। जिस प्रकार चन्द्र की कला का वीर्य पर प्रभाव पड़ता है उसी प्रकार सूर्य का भी प्रभाव पड़ता है। यह तो सत्य ही है कि चन्द्र में जो प्रकाश है वह सूर्य का है। चन्द्र के जिस भाग पर सूर्य की किरणें पड़ती हैं उसी भाग में प्रकाश उत्पन्न हो जाता है और वह किरणें जिस प्रकार बढ़ती जाती हैं, उसी प्रकार चन्द्र में प्रकाश बढ़ता जाता है। इससे स्पष्ट है कि चन्द्र में कलाओं का संचार सूर्य के ही प्रकाश से होता है।

जिस दक्षिणायन पक्ष में सूर्य की कलाओं का क्षय होता है तो वह क्षीणता चन्द्र में भी हो जाती है और वही क्षीणता वीर्य

इच्छानुसार सन्तान

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वीरेन्द्र गुप्तः

CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri