इच्छानुसार संतान
Ichhanusar Santan
by बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta)
Source: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (origin)
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Read in contextरोहिणी नक्षत्र- रोहिणी नक्षत्र में गर्भाधान करने से प्रजा की अधिक वृद्धि होती है। जिस प्रकार रोहिणी नक्षत्र में समस्त तारे एक समान ही तेज और रूप के हैं उसी प्रकार रोहिणी नक्षत्र में गर्भाधान की हुई सन्तान भी एक जैसे रंग रूप की होंगी।
मृगशीर्ष नक्षत्र- मृगशीर्ष नक्षत्र का दूसरा नाम प्रजापति भी है। प्रजापति प्रजा का पति होने से सब देवों (शक्तियों) में श्रेष्ठ है। सब देवों की श्री है। इसलिए मृगशीर्ष नक्षत्र में गर्भाधान करने से सन्तान भी मनुष्यों में प्रजापति के समान श्रीमान और श्रेष्ठ होती है।
पुनर्वसु नक्षत्र- पुनर्वसु नक्षत्र में पुनराधान करना श्रेष्ठ है। यदि गर्भस्थिति ठीक न हो तो पुनराधान पुनर्वसु नक्षत्र में करने से निश्चय ही गर्भ स्थित होता है। परन्तु स्त्री पुरुष में कोई रोगदि न हो।
फाल्गुनी नक्षत्र- फाल्गुनी नक्षत्र का दूसरा नाम अर्जुनी है और यह नाम गूढ है। फाल्गुनी अर्थात् फल का देने वाला नक्षत्र। फल देने की दृष्टि से फाल्गुनी नक्षत्र को इन्द्र नक्षत्र भी कहते हैं। यदि आप चाहते हैं कि मेरी सन्तान में अर्जन करने की क्षमता अधिक हो अर्थात् धन के संग्रह करने में पूर्ण समर्थ हो और सम्पत्ति का अर्जन करते हुए परम ऐश्वर्यशाली इन्द्र के समान हो तो फाल्गुनी नक्षत्र में गर्भाधान करें। फाल्गुनी नक्षत्र दो हैं। एक पूर्वाफाल्गुनी और दूसरा उत्तराफाल्गुनी। पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में गर्भाधान करने से सन्तान धनपति उन्नीतशील होती है और उत्तराफाल्गुनी में गर्भाधान करने से सन्तान उत्तरोत्तर उन्नीतशील होती है और उसके आगे उसकी सन्तान भी श्रेय और श्री को पाने वाली होती है।
हस्ता नक्षत्र- हस्त नक्षत्र का हाथ से विशेष सम्बन्ध है। हस्ता नक्षत्र में गर्भित बालक हाथ का उदार दानी, परोपकारी होता है। अर्थात् अपने द्वार से किसी को खाली नहीं जाने देता है। यदि आप उदार दानी, परोपकारी सन्तान चाहते हैं तो हस्त नक्षत्र में गर्भाधान करें।
इच्छानुसार सन्तान
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वीरेन्द्र गुप्तः
CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri