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हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

Harita Samhita of Sage Harita with Hindi Commentary

महर्षि हारीत / आत्रेय मुनि द्वारा

DevanagariHindipublished548 पृष्ठ

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पृष्ठ 9

हारीतसंहिताविषयानुक्रमणिका ।

विषय. | पृष्ठ. | विषय. | पृष्ठ.
अथ प्रथमस्थानम् । | | लंघनकी योग्यता .... | १३
मंगलाचरण .... | १ | जठराग्निका कर्म .... | ,,
आत्रेयहारीतसंवाद .... | ,, | सामनिरामव्याधिका उपक्रम .... | १४
वैद्यशास्त्रपठनविधि .... | ५ | वैद्यकी योग्यता .... | ,,
चिकित्सासंग्रह .... | ७ | पुण्यार्थ उपचार करनेयोग्य मनुष्य |
शल्यतंत्र .... | ८ | उपचारसे धन लेने योग्य मनुष्य .... | १५
शालाक्य .... | ,, | यश मिलने योग्य मनुष्य .... | ,,
कायचिकित्सा .... | ,, | चिकित्सा करनेको अयोग्य मनुष्य .... | ,,
अगदोंके नाम .... | ९ | वैद्यकर्तव्यका उपसंहार .... | १६
बालचिकित्सा .... | ,, | देशकालबलाबल .... | ,,
विषतन्त्रके नाम .... | ,, | देशके भेद .... | ,,
भूतविद्याका नाम .... | ,, | अनूपदेशलक्षण .... | ,,
वाजीकरण .... | ,, | जाङ्गलदेशलक्षण .... | १७
रसायनतन्त्र .... | १० | साधारणदेशलक्षण .... | ,,
उपाङ्गचिकित्सा .... | ,, | कालज्ञान .... | १८
वैद्यशिक्षाविधान .... | ,, | कालका स्वरूप .... | ,,
उपचार करनेकी योग्यता .... | ११ | उत्पातकालका स्वरूप .... | ,,
देशकाल आदिका ज्ञान .... | ,, | प्रवर्त्तककालका स्वरूप .... | ,,
उपचार करनेका फल .... | ,, | संहारकालका स्वरूप .... | १९
वैद्यका वैद्यत्व .... | ,, | कालका सनातनत्व .... | ,,
दो प्रकारका उपचार उपक्रम .... | ,, | कालका नाशक स्वरूप .... | ,,
दो प्रकारके वैद्य .... | ,, | अन्यकालोंके स्वरूप .... | ,,
व्याधिके साध्य असाध्य विचार .... | १२ | ऋतुचर्य्या .... | ,,
उपचारका फल .... | ,, | अयनोंका वर्णन .... | २०
दोषके शेष रहजानेसे हानि .... | ,, | दक्षिणायनका लक्षण .... | ,,
अपथ्यसे हानि .... | १३ | उत्तरायणका लक्षण .... | २१
| | वर्षार्ऋतुलक्षण. .... | ,,
| | शरद्ऋतुका लक्षण .... | २२