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गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

Gitavali of Goswami Tulsidas with Gita Press Commentary

by गोस्वामी तुलसीदास

DevanagariHindipublished454 pages

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Page 9

· श्रीहरिः
दो शब्द
───x───
कविचक्रचूडामणि गोसाईं श्रीतुलसीदासजीके ग्रन्थोंमें
कलेवरकी दृष्टिके रामचरितमानसके पश्चात् दूसरा नंबर गीतावली-
का ही है । इसमें सम्पूर्ण रामचरित पदोंमें वर्णन किया गया है ।
परन्तु रामायणकी अपेक्षा इसकी वर्णनशैली कुछ दूसरे ही ढंगकी
है । रामायण महाकाव्य है, उसमें सभी रसोंका साङ्गोपाङ्ग
दिग्दर्शन कराया गया है; वहाँ कविहृदयके सभी भावोंका गम्भीर
विश्लेषण देखनेमें आता है । परन्तु गीतावलीमें आरम्भसे लेकर
अन्तपर्यन्त कविका एक ही भाव दिखायी देता है; वह कथानकके
क्रमकी अपेक्षा न करके अपने इष्टदेवकी मधुर झाँकी करानेमें ही
संलग्न है । गीतावलीमें उसका ललित भाव ही व्यक्त हुआ है ।
जहाँ-जहाँ भगवान्‌के रूपमाधुर्य अथवा करुणरसके आस्वादनका
अवसर मिला है, वहाँ-वहाँ तो वे मध्याह्नकालीन सूर्यकी तरह
मन्दगतिसे चलते हैं, इसके विपरीत जहां अन्य विषय है उसकी
ओर दृष्टिपाततक नहीं करते । यहां तक कि अन्य युद्धोंकी तो बात
ही क्या, रावणवधका भी उन्होंने जिक्र नहीं किया; परशुरामजी-
के विषयमें 'भंज्यौ भृगुपति-गरब सहित, तिहुँ लोक बिमोह कयो ॥'
[बाल० ६०] केवल इतना ही कहा है, किष्किन्धाकाण्ड केवल दो
पदोंमें ही समाप्त हो जाता है, लंकादहनका भी हनुमान्‌जीने
सीताजी से विदा होते समय केवल जिक्र ही किया है, तथा
लंकाकाण्ड, जो अन्य रामायणोंमें बहुत विस्तृत मिलता है, यहाँ
अरण्य और किष्किन्धाको छोड़कर और सबसे छोटा है ।
इसके विपरीत भगवान्‌की बाललीला, भरतमिलाप, जटायु-
उद्धार, विभीषणशरणांगति, सीताजीकी वियोगव्यथा, राम-