गीता-संग्रह (२५ प्राचीन गीताएँ)

गीता-संग्रह (२५ प्राचीन गीताएँ)
Gita Sangraha 25 Gitas
by महर्षि वेदव्यास / भगवान दत्तात्रेय आदि
DevanagariHindipublished675 pages
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२०४ * गीता-संग्रह *
गिरनेकी भाँति भयंकर समझते हैं। परंतु उनकी वह मान्यता भिन्न है। मैं इस अजगरवृत्तिको अज्ञानका नाशक और समस्त दोषोंसे रहित मानता हूँ। अतः दोष और तृष्णाका त्याग करके मनुष्योंमें विचरता हूँ॥ ३६॥
भीष्म उवाच
अजगरचरितं व्रतं महात्मा
य इह नरोऽनुचरेद् विनीतरागः।
अपगतभयलोभमोहमन्युः
स खलु सुखी विचरेदिमं विहारम्॥ ३७॥
भीष्मजी कहते हैं— राजन्! जो महापुरुष राग, भय, लोभ, मोह और क्रोधको त्यागकर इस आजगरव्रतका पालन करता है, वह इस लोकमें सानन्द विचरण करता है॥ ३७॥
॥ इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि आजगरगीता सम्पूर्णा॥