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गरुड़ पुराण

गरुड़ पुराण

Garuda Purana

by महर्षि वेदव्यास

DevanagariHindipublished634 pages

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Page 371

काण्ड ] | औषधियोंके पर्यायवाची नाम | ३६१

सेंधानमक मिलाकर पीनेसे स्त्रियोंको शीघ्र ही प्रसव हो जाता है। बिजौरा नीबूकी जड़को कटिप्रदेशमें बाँधनेसे भी प्रसव यथाशीघ्र हो जाता है। अपामार्गकी जड़ सिरपर धारण करनेपर स्त्रीको गर्भजनित पीड़ा नहीं होती।

हे हर ! जिस बालकके मस्तकपर गोरोचनका तिलक रहता है और जो बालक शर्करा तथा कुष्ठ नामक औषधिका पान करता है वह विष, भूत, ग्रह तथा व्याधिजनित विकारोंसे दूर रहता है। हे रुद्र ! शंखनाभि (सुगंधित द्रव्यविशेष), वच, कुष्ठ और लोहा (लोहेकी ताबीज या कडुला) बच्चेको सदैव धारण कराना चाहिये। इससे उपसर्गजन्य विपदाओंसे बच्चोंकी रक्षा होती है।

मधुके सहित पलाश, आँवला और विडङ्गका चूर्ण तथा गोघृतका पान करनेसे प्राणी महामति (कुशाग्रबुद्धिवाला) बन जाता है। हे महादेव ! एक मासतक इस औषधिका सेवन करनेसे मनुष्य वृद्धावस्थाजन्य मृत्युके भयसे रहित हो जाता है। हे रुद्र ! पलाशबीज, तिल, मधु और घृत समान भागमें लेकर एक सप्ताह्तक सेवन करनेसे वृद्धावस्था दूर हो जाती है। आँवलेका चूर्ण, मधु, तेल (तिलका) तथा गोघृतके साथ एक मासपर्यन्त सेवन करनेसे मनुष्य युवा हो उठता है और विद्वान् बन जाता है। हे शिव ! आँवलेका चूर्ण मधु अथवा जलके साथ प्रातःकाल सेवन करनेपर नासिकाकी शक्ति बढ़ जाती है। जो मनुष्य घी और मधुके साथ कुष्ठचूर्णका सेवन करता है, वह सुन्दर गन्धसे समन्वित देहवाला हो जाता है और एक हजार वर्षतक जीवित रहता है।

(अध्याय २०२)


गो एवं अश्व-चिकित्सा

**श्रीहरिने कहा—**हे शिव ! जो गौ अपने बछड़ेसे द्वेष करती है, उसे नमकसे युक्त उसीका दूध पिला देना चाहिये। ऐसा करनेसे वह अपने बछड़ेसे प्रेम करने लगेगी। कुत्तेकी हड्डीको भैंस और गायके गलेमें बाँधनेसे उनके शरीरमें पड़े हुए कीड़े गिर जाते हैं, इसमें संदेह नहीं है। घुँघुचीकी जड़को खिलानेसे भी गायोंके शरीरमें पड़े हुए कीड़े विनष्ट हो जाते हैं। हे शिव ! वरुणफलके रसको हाथसे मथकर उसे घावमें भरनेसे उसके अंदर पड़े हुए चार पैरवाले तथा दो पैरवाले कीड़े नष्ट हो जाते हैं। हे रुद्र ! जया नामक औषधिको घावमें भरनेसे वह सूख जाता है। हाथीका मूत्र पिलानेसे गाय और भैंसोंमें फैलनेवाला उपसर्ग रोग (दैवी आपदाजन्य महामारी आदि) नष्ट हो जाता है। मट्ठेमें मसूर और साठी चावलको घिसकर पिलानेसे भी लाभ होता है।

गाय और भैंसके दूधमें तुलनात्मक दृष्टिसे गायका दूध ही पुरुषके लिये विशेष हितकारी होता है। हे शिव ! शरपोंखाके पत्तेको नमकके साथ खिलानेसे घोड़े तथा हाथियोंका वारिस्फोट नामक रोग नष्ट हो जाता है। हे हर ! घृतकुमारीके पत्तेका नमकके साथ सेवन करानेसे घोड़े आदिकी खुजली दूर हो जाती है।

(अध्याय २०३)


औषधियोंके पर्यायवाची नाम

**सूतजीने कहा—**हे ऋषियो! भगवान् धन्वन्तरिने इस प्रकार महर्षि सुश्रुतको वैद्यकशास्त्र सुनाया था। अब मैं औषधियोंके पर्यायवाची नाम संक्षिप्त रूपमें आप सभीको सुनाऊँगा।

**स्थिरा—**विदारीगन्धा, शालपर्णी तथा अंशुमती एक ही औषधिके नाम हैं। लाङ्गली नामक औषधि