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गरुड़ पुराण

गरुड़ पुराण

Garuda Purana

by महर्षि वेदव्यास

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DevanagariHindipublished634 pages

Page 251 of 634

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Page 251

काण्ड ] चन्द्रवंशवर्णन २४१


महाभोजसे भोज और उस वृष्णिसे सुमित्र नामक पुत्र हुआ। सुमित्रसे स्वधाजित्, अनमित्र तथा अशिनि हुए। अनमित्रका पुत्र निघ्न और निघ्नका पुत्र सत्राजित् हुआ। अनमित्रसे प्रसेन तथा शिबि नामक दो अन्य पुत्र भी हुए थे। शिबिसे सत्यक, सत्यकसे सात्यकि हुआ। सात्यकिके संजय और उस संजयके कुलि हुए। उस कुलिका पुत्र युगन्धर था। इन सभीको शिबिवंशी शैबेय कहा गया है।

अनमित्रके ही वंशमें वृष्णि, श्वफल्क तथा चित्रक नामक अन्य तीन पुत्र हुए थे। श्वफल्कने गान्दिनीके गर्भसे अक्रूरको जन्म दिया, जो परम वैष्णव थे। अक्रूरसे उपमद्गु हुआ, जिसका पुत्र देवद्योत था। उपमद्गुके अतिरिक्त अक्रूरके देववान् और उपदेव नामक दो पुत्र माने गये हैं।

अनमित्र-पुत्र चित्रकके पृथु तथा विपृथु नामक दो पुत्र थे। सात्वतनन्दन अन्धकका पुत्र शुचि माना जाता है। भजमानके कुकुर और कम्बलवर्हिष दो पुत्र हुए। कुकुरसे धृष्टका जन्म हुआ। उसका पुत्र कापोतरोमक था। उस कापोतरोमकका विलोमा और विलोमासे तुम्बुरुका जन्म हुआ। तुम्बुरुसे दुन्दुभि तथा दुन्दुभिका पुनर्वसु माना जाता है। उस पुनर्वसुका पुत्र आहुक था। आहुकके एक पुत्री हुई, जिसका नाम आहुकी था। आहुकके दो पुत्र हुए जिनका नाम देवक और उग्रसेन था। देवकसे देवकीका जन्म हुआ। इसके अतिरिक्त देवकके वृकदेवा, उपदेवा, सहदेवा, सुरक्षिता, श्रीदेवी और शान्तिदेवी नामकी छः कन्याएँ और भी थीं। इन सातों कन्याओंका विवाह वसुदेवके साथ हुआ था। सहदेवाके देववान् और उपदेव नामक दो पुत्र थे।

आहुकपुत्र उग्रसेनके कंस, सुनामा तथा वट आदि नामके अनेक पुत्र हुए। अन्धकपुत्र भजमान्‌से विदूरथ नामका पुत्र हुआ था। विदूरथसे शूर और शूरके शमी नामका पुत्र हुआ। शमीसे प्रतिक्षत्र, प्रतिक्षत्रसे स्वयंभोज, स्वयंभोजसे हृदिक तथा हृदिकसे कृतवर्मा हुए। शूरसे ही देव, शतधनु और देवामीढुषका भी जन्म हुआ था। मारिषाके गर्भसे शूरके वसुदेव आदि अन्य दस पुत्र थे। शूरसे पृथा, श्रुतदेवी, श्रुतकीर्ति, श्रुतश्रवा और राजाधिदेव (राजाधिदेवी) नामवाली पाँच पुत्रियाँ भी थीं। शूरने पुत्री पृथाको कुन्तिराजको दे दिया था। कुन्तिराजने शूरसे प्राप्त उस कन्याका विवाह पाण्डुसे कर दिया। पाण्डुकी उस पृथा नामकी पत्नीसे धर्म, वायु और इन्द्रादि देवोंके अंशसे युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन तथा पाण्डुकी पत्नी माद्रीमें अश्विनीकुमारके अंशसे नकुल तथा सहदेव नामक पुत्र हुए। विवाहके पूर्व ही पृथासे कर्णका जन्म हुआ था।

शूरकी पुत्री श्रुतदेवीके गर्भसे दन्तवक्त्र हुआ, जो अत्यन्त वीर योद्धा था। श्रुतकीर्ति कैकयराजको ब्याही गयी थी। कैकयराजसे उसके सन्तर्दन आदि पाँच पुत्र हुए। राजाधिदेवीके गर्भसे दो पुत्र उत्पन्न हुए थे, जिनका नाम विन्दु और अनुविन्दु था। चेदिराज दमघोषको श्रुतश्रवा ब्याही थी। उससे शिशुपालका जन्म हुआ।

वसुदेवके पौरव, रोहिणी, मदिरा, देवकी, भद्रा आदि जो अन्य स्त्रियाँ हैं, उनमें रोहिणीके गर्भसे बलभद्र हुए। बलभद्रकी पत्नी रेवतीके गर्भसे सारण और शठ आदिका जन्म हुआ। देवकीके गर्भसे पहले छः पुत्र उत्पन्न हुए। जिनके नाम कीर्तिमान्, सुषेण, उदार्य, भद्रसेन, ऋजुदास और भद्रदेव हैं। कंसने इन सभी पुत्रोंको मार डाला था। देवकीके सातवें पुत्रके रूपमें बलराम और आठवें कृष्ण थे। कृष्णकी सोलह हजार रानियाँ थीं। रुक्मिणी, सत्यभामा, लक्ष्मणा, चारुहासिनी तथा जाम्बवती आदि आठ प्रधान पत्नियाँ थीं। इनसे उनके बहुत-से पुत्र हुए।