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गरुड़ पुराण

गरुड़ पुराण

Garuda Purana

by महर्षि वेदव्यास

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DevanagariHindipublished634 pages

Page 250 of 634

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Page 250

२४० संक्षिप्त गरुडपुराण [ आचार-

भीमरथसे दिवोदास, दिवोदाससे प्रतर्दन हुआ, जो शत्रुजित् नामसे विख्यात हुआ।

ऋतध्वज उसी शत्रुजित्‌का पुत्र था। ऋतध्वजसे अलर्क, अलर्कसे सन्नति, सन्नतिसे सुनीत, सुनीतसे सत्यकेतु, सत्यकेतुसे विभु नामक पुत्र हुआ। विभुसे सुविभु, सुविभुसे सुकुमार, सुकुमारसे धृष्टकेतुकी उत्पत्ति हुई। उस धृष्टकेतुका पुत्र वीतिहोत्र था। वीतिहोत्रके भर्ग और भर्गके भूमिक नामका पुत्र हुआ। ये सभी विष्णुधर्मपरायण राजा थे।

नहुषपुत्र राजि या रजिके पाँच सौ पुत्र थे, जिनका संहार इन्द्रने किया था। नहुषके पुत्र क्षत्रवृद्धसे प्रतिक्षत्र हुए। उसका पुत्र संजय था। संजयके भी विजय हुआ। विजयका पुत्र कृत था। कृतके वृषधन, वृषधनसे सहदेव, सहदेवसे अदीन और अदीनके जयत्सेन हुआ। जयत्सेनसे संकृति और संकृतिसे क्षत्रधर्माकी उत्पत्ति हुई।

नहुषके क्रमशः यति, ययाति, संयाति, अयाति तथा विकृति नामक अन्य पाँच पुत्र थे। ययातिसे देवयानीने यदु और तुर्वसु नामक दो पुत्रोंको जन्म दिया। राजा वृषपर्वाकी पुत्री शर्मिष्ठाने ययातिसे द्रुह्यु, अनु और पूरु नामक तीन पुत्रोंको उत्पन्न किया।

यदुके सहस्त्रजित्, क्रोष्टुमना और रघु नामक तीन पुत्र थे। सहस्त्रजित्‌से शतजित्, शतजित्‌से हय तथा हैहय नामक दो पुत्र हुए। हयसे अनरण्य तथा हैहयसे धर्म हुआ। धर्मका पुत्र धर्मनेत्र हुआ। उस धर्मनेत्रका पुत्र कुन्ति था। कुन्तिसे साहंजि हुआ। साहंजिसे महिष्मान्, महिष्मान्‌से भद्रश्रेण्य, भद्रश्रेण्यसे दुर्दमकी उत्पत्ति हुई। दुर्दमसे धनक, कृतवीर्य, जानकि, कृताग्नि, कृतवर्मा और कृतौजा नामक छह बलवान् पुत्र हुए। कृतवीर्यसे अर्जुन तथा अर्जुनसे शूरसेन नामक पुत्र हुआ। उस पुत्रके अतिरिक्त कृतवीर्यके जयध्वज, मधु, शूर और वृषण नामक चार पुत्र हुए। शूरसेनसहित ये पाँचों पुत्र बड़े ही सुव्रती थे। जयध्वजसे तालजंघ, तालजंघसे भरत हुआ। कृतवीर्य वृषणका पुत्र मधु था। मधुसे वृष्णि हुआ, जिससे वृष्णिवंशियोंकी उत्पत्ति हुई।

क्रोष्टुके विजज्ञिवान् हुआ। उस विजज्ञिवान्‌का पुत्र आहि था। आहिसे उशंकु हुआ। उसका पुत्र चित्ररथ था। चित्ररथसे शशबिन्दु हुआ, जिसके एक लाख पत्नियाँ तथा पृथुकीर्ति, पृथुजय, पृथुदान, पृथुश्रवा आदि श्रेष्ठ दस लाख पुत्र थे। पृथुश्रवासे तम, तमसे उशना हुआ। उसका पुत्र शितगु था। तत्पश्चात् उसके श्रीरुक्मकवच हुआ। श्रीरुक्मकवचसे रुक्म, पृथुरुक्म, ज्यामघ, पालित और हरि—ये चार पुत्र हुए। ज्यामघसे विदर्भका जन्म हुआ।

विदर्भकी शैब्या नामकी एक पत्नी थी, उससे विदर्भने क्रथ, कौशिक तथा रोमपाद नामक तीन पुत्रोंको जन्म दिया। रोमपादसे बभ्रु और बभ्रुसे धृति हुआ।

कौशिकके ऋचि नामक पुत्र था। उसीसे चेदि नामका राजा हुआ। इसका पुत्र कुन्ति था। कुन्तिसे वृष्णि नामक पुत्र हुआ। वृष्णिसे निवृत्ति, निवृत्तिसे दशार्ह, दशार्हसे व्योम और व्योमसे जीमूत नामका पुत्र हुआ। जीमूतसे विकृतिका जन्म हुआ। उस विकृतिका पुत्र भीमरथ था। भीमरथसे मधुरथ और मधुरथसे शकुनि उत्पन्न हुआ। शकुनिका पुत्र करम्भि था। उस करम्भिका पुत्र देवमान् माना जाता है। देवमान् या देवनतसे देवक्षत्र तथा देवक्षत्रसे मधु नामक पुत्र हुआ। मधुसे कुरुवंश, कुरुवंशसे अनु, अनुसे पुरुहोत्र, पुरुहोत्रसे अंशु, अंशुसे सत्त्वश्रुत और उससे सात्वत नामका राजा हुआ।

सात्वतके भजिन्, भजमान्, अन्धक, महाभोज, वृष्णि, दिव्यावन्य तथा देवावृध नामक सात पुत्र हुए। भजमान्‌से निमि, वृष्णि, अयुताजित्, शतजित्, सहस्त्राजित्, बभ्रु, देव और बृहस्पति नामके पुत्र हुए।