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दोहावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ५७३ दोहे सान्वय सटीक)

दोहावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ५७३ दोहे सान्वय सटीक)

Dohavali of Goswami Tulsidas with Gita Press Commentary

by गोस्वामी तुलसीदास

DevanagariHindipublished196 pages

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विषय पृष्ठ-संख्या | विषय पृष्ठ-संख्या
७७—विषयोंकी आशा ही | ६२—ज्ञानमार्गकी कठिनता ९३
दुःखका मूल है ८८ | ९३—भगवद्भजनके अतिरिक्त
७८—मोहमहिमा ८६ | और सब प्रयत्न व्यर्थ है ६३
७६—विषय-सुखकी हेयता ८६ | ९४—संतोषकी महिमा ६४
८०—लोभकी प्रबलता ८६ | ९५—मायाकी प्रबलता और
८१—धन और ऐश्वर्यके मद | उसके तरनेका उपाय ६४
तथा कामकी व्यापकता ६० | ६६—गोस्वामीजीकी अनन्यता ९४
८२—मायाकी फौज ६० | ६७—प्रेमकी अनन्यताके लिये
८३—काम, क्रोध, लोभकी | ॰चातकका उदाहरण ६५
प्रबलता ६० | ९८—एकाङ्गी अनुरागके अन्य
८४—काम, क्रोध, लोभके | उदाहरण १०५
सहायक ६० | ६६—मृगका उदाहरण १०५
८५—मोहकी सेना ६१ | १००—सर्पका उदाहरण १०५
८६—अग्नि, समुद्र, प्रबल स्त्री | १०१—कमलका उदाहरण १०६
और कालकी समानता ६१ | १०२—मछलीका उदाहरण १०६
८७—स्त्री झगड़े और मृत्युकी | १०३—मयूरशिखा बूटीका
जड़ है ६१ | उदाहरण १०७
८८—उद्बोधन ६२ | १०४—अनन्यताकी महिमा १०८
८६—गृहासक्ति श्रीरघुनाथजी- | १०५—गाढ़े दिनका मित्र ही
के स्वरूपके ज्ञानमें | मित्र है १०८
बाधक है ६२ | १०६—बराबरीका स्नेह दुःख-
६०—काम-क्रोधादि एक-एक | दायक होता है १०६
अनर्थकारक हैं, फिर | १०७—मित्रतामें छल बाधक है १०६
सबकी तो बात ही क्या ? ६२ | १०८—वैर और प्रेम अंधे
६१—किसके