Skip to content
SarvaKosh
चरक संहिता (द्वितीय भाग: चिकित्सा, कल्प व सिद्धि स्थान)

चरक संहिता (द्वितीय भाग: चिकित्सा, कल्प व सिद्धि स्थान)

Charaka Samhita Part 2 with Hindi Translation

by महर्षि चरक व दृढ़बल

Source: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (origin)

DevanagariSanskritpublished616 pages

Page 23 of 616

Read in context
Page 23

८ चरकसंहिता [ अ० १
भास्तमः सत्यमनृतं वेदाः कर्म शुभाशुभम् ।
न स्यात्कर्ता वेदिता च पुरुषो न भवेद्यदि ॥ ३९ ॥
नाशयो न सुखं नार्तिर्न गतिर्नागतिर्न वाक् ।
न विज्ञानं न शास्त्राणि न जन्म मरणं न च ॥ ४० ॥
न बन्धो न च मोक्षः स्यात्पुरुषो न भवेद्यदि ।
कारणं पुरुषस्तस्मात्कारणज्ञैरुदाहृतः ॥ ४१ ॥
न चेत्कारणमात्मा स्याद्भा'दयः स्युरहेतुकाः ।
न चैषु संभवेज्ज्ञानं न च तैः स्यात्प्रयोजनम् ॥ ४२ ॥
कृतं मृद्दण्डचक्रैश्च कुम्भकारादृते घटम् ।
कृतं मृत्तृणकाष्ठैश्च गृहकाराद्विना गृहम् ॥ ४३ ॥
यो वदेत्स वदेद्देहं संभूय करणैः कृतम् ।
विना कर्तारमज्ञानाद्युक्त्यागमबहिष्कृतः ॥ ४४ ॥
आत्मा—यदि कर्ता, वेदिता (ज्ञाता) पुरुष न हो तो प्रकाश, अन्धकार
सत्य, झूठ, स्वर्गादि के प्रतिपादक वेद, शुभाशुभ कर्म ये सब निष्प्रयोजन हो
जाय । यदि कर्त्ता, बोद्धा पुरुष न हो तो धर्म और अधर्म का कोई आश्रय न
रहे, धर्म और अधर्म निराश्रय हो जाए । सुख, दुःख, जाना, आना, सत्य वाणी,
शास्त्रज्ञान, शास्त्र, जन्म, मरण, बन्ध और मोक्ष कुछ भी न रहे। क्योंकि पुरुष के
लिये ही ये सब हैं । इसलिये कारण को जानने वालो ने पुरुष को कारण कहा
है। यदि आत्मा कारण न हो तो दीप्ति आदि बिना कारण के हो जाय । पुरुष
के न होने पर शरीर की सृष्टि बिना कारण की हो जाय । इतना ही नहीं, इन
भूतों से बने शरीर में ज्ञान (चैतन्य) भी संभव नहीं। (क्योंकि भूतों मे ज्ञान
(चैतन्य) का अभाव है), ज्ञान और चेतना का कारण आत्मा है। आत्मा के
न होने पर ये सब निष्प्रयोजन हो जाते हैं । जिस प्रकार कोई कहे कि 'बिना
कुम्हार के मिट्टी, दण्डे और चक्र ने मिल कर घड़ा बना दिया, अथवा बिना
घर बनाने वाले के मिट्टी तिनके और काष्ठ से घर बन गया, उसी प्रकार कर्ता
रूप आत्मा के बिना ही कारणरूप पञ्चमहाभूतों ने मिल कर स्वय इस शरीर को
बनाया है, यह कहना अज्ञान से पूर्ण और युक्ति आदि प्रमाण से रहित है ॥४४॥
कारणं पुरुषः सर्वैः प्रमाणैरुपलभ्यते ।
येभ्यः प्रमेयं सर्वेभ्यः आगमेभ्य प्रमीयते ॥ ४५ ॥
१ खादय.-यो०