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चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)

चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)

Charaka Samhita Part 1 with Hindi Translation

by महर्षि चरक व अग्निवेश

Source: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (origin)

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DevanagariSanskritpublished639 pages

Page 351 of 639

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Page 351

अ० २७ ] सूत्रस्थानम् ३३३
मत्स्याः स्निग्धाश्च वृष्याश्च बहुदोषाः प्रकीर्तिताः ।
शैवलाहारभोजित्वात्स्वप्नस्य च विवर्जनात् ॥ ७९ ॥
रोहितो दीपनोयश्च लघुपाको महाबलः ।
स्नेहनं बृंहणं वृष्यं श्रमघ्नमनिलापहम् ॥ ८० ॥
वराहपिशितं बल्यं रोचनं स्वेदनं गुरु ।
बल्यो वातहरो वृष्यश्चक्षुष्यो बलवर्धनः ॥ ८१ ॥
मेधास्मृतिकरः पथ्यः शोषघ्नः कूर्म उच्यते ।
गव्यं केवलवातेषु पीनसे विषमज्वरे ॥ ८२ ॥
शुष्क-कास-श्रमात्यग्नि-मांस-क्षय-हितं च तत् ।
स्निग्धोष्णमधुरं वृष्यं माहिषं गुरु तर्पणम् ¹ ॥ ८३ ॥
दार्थं बृहत्त्वमुत्साहं स्वप्नं च जनयत्यपि ।
धार्तराष्ट्रचकोराणां दक्षाणां शिखिनामपि ॥ ८४ ॥
चटकानां च यानि स्युरण्डानि च हितानि च ।
रेतःक्षीणेपु कासेषु हृद्रोगेषु क्षतेषु च ॥ ८५ ॥
मधुराण्यविदाहीनि ² सद्यो बलकराणि च ।
शरीरबृंहणे नान्यद्दाद्यं ³ मांसाद्विशिष्यते ।
इति वर्गस्तृतीयोऽयं मांसानां परिकीर्तितः ॥ ८६ ॥
इनमें प्रसह, भूशय, आनूप, जलज और जलचर प्राणियों का मांस गुरु,
स्निग्ध, मधुर, शक्ति बढ़ाने वाला, वीर्यवर्द्धक, वातनाशक, कफपित्त को बढ़ाने
वाला है, इनका मांस नित्य प्रति व्यायाम करने वाले, जिनकी जाठराग्नि
प्रदीप्त हो, उनके लिये हितकारी है। 'प्रसह' जानवर दो प्रकार के हैं। एक
मांस खाने वाले सिंह आदि, दूसरे मांस न खाने वाले गाय आदि। इनमें
मांस खाने वाले 'प्रसह' पक्षी या पशुओं का मांस पुराने अर्श-रोग, ग्रहणी-रोग,
क्षय, या निर्बल पुरुष के लिये उपकारी है।
लावा (बटेर) आदि विष्किरवर्ग के पक्षी, प्रतुदपक्षी, जांगलदेश के पशु
इनका मांस लघु, शीतल, मधुर कषाय रस, और पित्तप्रधान, मध्यम वात,
कनिष्ठ कफ वाले सन्निपात में हितकारी है। बटेर आदि समस्त विष्किर पक्षियों
का मांस 'प्रसह' श्रेणो के मांसों से गुणों में मिलता है, थोड़ा ही अन्तर है।
बकरी का मांस बहुत ठण्डा नहीं, बहुत भारी नहीं, बहुत स्निग्ध नहीं,
कुछ ठण्डा, कुछ गुरु और कुछ स्निग्ध है) इसलिये वह दोषों को कुपित
१. ... पाठः । २. मधुराण्यविपाकीनि इति पाठः । ३. खाद्यं इति पाठः ।